नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल की तपपूर्ति होने में कुछ दिन ही बाकी थे, कि दो उल्लेखनीय घटनाएं हुईं। एक स्वीडन के प्रतिष्ठित रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार से सम्मानित करना और दूसरी नॉर्वे के रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट पुरस्कार से नवाजा जाना। पिछले 12 वर्षों के उनके अंतरराष्ट्रीय सम्मान की संख्या लगभग 32 है। दुनिया के तकरीबन 20 देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह सम्मान पीएम मोदी का तो है ही, साथ-साथ इस देश की 140 करोड़ जनता का भी है। पिछले लगातार तीन चुनावों में भारत की जनता ने नरेंद्र मोदी पर अटल विश्वास बनाए रखा है। साथ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके नेतृत्व पर मुहर लगी है। वर्ष 2014 में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में जब पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब नवभारत का उदय हुआ। उनके नेतृत्व में भारत की विश्व में आवाज बुलंद हुई है।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक घटक के रूप में शिवसेना ने हमेशा पीएम मोदी का साथ दिया। अपवाद सिर्फ उस समय का रहा, जब तत्कालीन पार्टी का नेतृत्व शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के विचारों से भटक गया था और उन्होंने अनैतिक रास्ता चुन लिया था। लेकिन हम शिवसैनिकों ने जून 2022 में इस अनैतिकता को छोड़कर फिर से उनका साथ दिया।
कौशल को बढ़ावा: पीएम मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन लाना आरंभ किया। विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा, मातृभाषा को प्राथमिकता और वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण की नीति का स्वीकार किया।
महिलाओं को सक्षम बनाया: महिलाओं के सक्षमीकरण के लिए भी अहम निर्णय लिए। सैन्यसेवा में अधिक अवसर प्रदान करने, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान’ जैसे उपक्रमों से महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने जैसी गतिविधियों को नई ऊर्जा दी। संसद में महिला आरक्षण का विधेयक प्रस्तुत करने को लेकर सिर्फ भाष्य नहीं किया, बल्कि प्रत्यक्ष कृति भी की। हालांकि विपक्षी विचारों ने इस विधेयक को मंजूर नहीं होने दिया।
किसानों के दोस्त...पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को सीधे आर्थिक मदद दी। सीधे लाभ की वजह से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रहा। अब तक करोड़ों किसानों के खाते में सीधे पैसे जमा हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं में बड़ा निवेश कर राष्ट्रीय सुरक्षा को नई शक्ति दी। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर देकर भारत को शस्त्र निर्माण में भी सक्षम बनाने का काम उन्होंने किया।
कोरोना में दिखाई मानवीयता: कोरोना के दिनों में जब पूरे विश्व में बिखराव की स्थिति थी, मोदी ने समर्थता से देश को राहत पहुंचाई। गरीबों के खाने-पीने का ध्यान रखा। मुफ्त टीकाकरण किया। इसके अलावा, औषध निर्माण के क्षेत्र में भारत को एक सक्षम विकल्प के रूप में विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया और अनेक देशों को टीका उपलब्ध करवाया। यह सिर्फ विदेशी नीति नहीं बल्कि भारत के मानवतावादी संस्कार की विश्व को हुई एक नई पहचान है।
बड़ा सपना: देश को विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत का बड़ा सपना दिखाया। इसे साकार करने का मार्ग बताने के साथ-साथ इसे पूरा करने की दिशा में नींव रखी। देश अब डिजिटल हो रहा है। भारत दुनिया में सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, उद्योगिनी योजना, लखपति दीदी योजना, उज्ज्वला योजना सफलतापूर्वक चलाई गई। युवाओं के लिए ‘प्रधानमंत्री रोजगार निर्माण कार्यक्रम’, ‘स्टार्ट अप इंडिया’ अभियान चलाया। उद्योग-व्यवसाय में सुलभता के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज देने के साथ-साथ ‘पीएम गतिशक्ति’ और ‘राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर’ जैसा महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम भी शुरू किया।
बुनियादी विकास मजबूत: देश में बुनियादी सुविधाओं का कभी इतना विकास नहीं हुआ होगा जितना आज हुआ है। सड़कें, महामार्ग जैसी शृंखला का विस्तार हुआ है। रेल मार्ग के डबल ट्रैकिंग और विद्युतीकरण का कार्य तेजी से जारी है। 23 शहरों में मेट्रो का जाल, कार्यरत हवाईअड्डों की संख्या में दोगुनी वृद्धि, वंदे भारत की गतिमानता, रेल स्टेशनों का चहुंओर विकास, सब मोदी सरकार ने किया है। ‘अटल सेतु’, ‘मेट्रो परियोजना’, ‘समृद्धि महामार्ग’, ‘कोस्टल रोड’, ‘जलजीवन मिशन’ जैसी अनेक परियोजनाएं पूरी हुईं, यह सिर्फ पीएम मोदी के सहयोग एवं विश्वास से ही संभव हो पाया! आज दुनिया बड़ी उम्मीद से निवेश के लिए भारत की ओर देख रही है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से भारत उत्पाद क्षेत्र में भी सक्षम हो रहा है। वैश्विक मंच पर भारत अधिक आत्मविश्वास से खड़ा है। जी-20 जैसी परिषद में विश्व का नेतृत्व किया है। विदेश नीति में आवाज अधिक प्रभावी हुई और वैश्विक स्तर पर संबंध भी अधिक मजबूत हुए हैं।
देश के काम में जुटे मोदी
विपक्षी टीका-टिप्पणी करते हैं, उन्हें कोई दूसरा काम नहीं। स्वयं भी कोई काम नहीं करते हैं और दूसरे कुछ कर रहे हों तो, उसमें भी रुकावटें डालना विपक्ष की प्रवृत्ति है। इसके बावजूद, विपक्षी मोदी के विषय में आरोप करने का विचार भी नहीं कर सकते। उनका कार्यकाल ही निष्कलंक है। हालांकि अनेक बड़े निर्णयों का क्रियान्वयन शुरुआत में कठिन था, परंतु दीर्घकालीन विचार कर देशहित को प्राथमिकता देने की उनकी भूमिका कायम रही है। जीएसटी लागू कर एक देश, एक कर की संकल्पना प्रत्यक्ष में लाना, उनके लिए दशकों से लागू कर प्रणाली बदलना आसान काम नहीं था, परंतु मोदी जी ने सभी राज्यों को साथ लेकर यह क्रांतिकारी आर्थिक बदलाव किया।
निर्णय लेने की विलक्षण क्षमता
पीएम मोदी की काम करने की प्रचंड ऊर्जा, निर्णय लेने की विलक्षण क्षमता, चाहे कोई विषय कितना भी कठिन हो, परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, बिल्कुल सटीक निर्णय लेते हैं। धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हो, राम मंदिर का निर्माण हो, ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून हो, या फिर सर्जिकल स्ट्राइक और पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर... यह सभी साहसिक निर्णय उन्होंने लिए और उस निर्णय की पूरी जिम्मेदारी भी ली।