प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा 'गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के बाद लोगों ने मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया। तब से लेकर पिछले 25 वर्षों तक, मैंने सरकार के मुखिया के तौर पर अपनी पूरी क्षमता से देश की सेवा की है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा,'इस कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक के जरिए मेरे दिल की भावनाएं और भी जीवंत हो उठीं। पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद को इस रूप में देखना और उनके होलोग्राम के साथ बातचीत करने का अवसर मिलना, ऐसा लगा मानो मैं 33 साल पीछे समय में चला गया हूं। 1993 में वडोदरा में गुरुदेव के साथ मेरी मुलाकात, हमारी बातचीत, उनका स्नेह और उनका आशीर्वाद सब कुछ मेरी आंखों के सामने बिल्कुल साफ तौर पर आ गया। एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा मानो मैं फिर से उनके साक्षात सानिध्य में हूं। यह मेरे लिए बेहद भावुक कर देने वाला अनुभव था। मुझे यह अद्भुत अनुभव देने के लिए मैं चिन्मय मिशन के सभी सदस्यों का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं।
गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'मुझे आज भी याद है कि उनके साथ मेरी पिछली मुलाकात में हमने कितनी गंभीर चर्चा की थी। उस चर्चा का मुख्य विषय था - युवा शक्ति का निर्माण करना और उसके जरिए एक मजबूत और सक्षम भारत बनाना। उनसे मिलने के कुछ साल बाद, लोगों ने मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया। तब से लेकर पिछले 25 वर्षों तक, मैंने सरकार के मुखिया के तौर पर अपनी पूरी क्षमता से देश की सेवा की है। इस पूरे सफर में गुरुदेव का आशीर्वाद मेरे साथ रहा है।'
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, 'जब देश ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए, तो मैंने सोचा कि हमें इस अवसर को न केवल 'विकसित भारत' के विजन को प्रेरित करने का एक मंच बनाना चाहिए, बल्कि भारत की उस भावना को भी जीवंत करना चाहिए जो अमर विचारों के साथ जीना जानती है, और हजारों वर्षों के अपने अनुभव के आधार पर, आने वाली पीढ़ियों के लिए पूरी मानवता की चिंता कर सकती है।'
क्या है चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन?
बता दें कि 23 से 25 अक्तूबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। यह आयोजन 'चिन्मय मिशन' के 75 वर्षों के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोहों का समापन है। चिन्मय मिशन एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन है, जिसकी स्थापना 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी, ताकि वेदांत और भगवद गीता का ज्ञान सभी तक पहुंचाया जा सके। पिछले कुछ दशकों में, इस मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा के क्षेत्रों में अपने कार्यों का विस्तार किया है।