शांति के लिए एक शब्द बोलने को नहीं हैं तैयार
विपक्ष पर हमला बोलते हुए रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये लोग उपदेश दे रहे हैं, लेकिन शांति के लिए एक शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं हैं, हिंसा रोकने के लिए एक शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं है। इसका मतलब है कि हिंसा को, पुलिस पर हो रहे हमलों को आपकी मौन सहमति है। ये देश देख रहा है। झूठ बेचने वाले, अफवाह फैलाने वाले इन लोगों को पहचानने की जरूरत है। ये दो तरह के लोग हैं। एक वो लोग जिनकी राजनीति दशकों तक वोट बैंक पर ही टिकी रही है। दूसरे वो लोग जिनको इस राजनीति का लाभ मिला है। वोट बैंक की राजनीति करने वाले और खुद को भारत का भाग्य विधाता मानने वाले, आज जब देश की जनता द्वारा नकार दिए गए हैं, तो इन्होंने अपना पुराना हथियार निकाल लिया है- बांटों, भेद करो और राजनीति का उल्लू सीधा करो।'
मुस्लिमानों को नहीं भेजा जाएगा डिटेंशन सेंटर
नागरिकता संशोधन कानून भारत के किसी नागरिक के लिए, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान, के लिए है ही नहीं। ये संसद में बोला गया है। ये कानून का इस देश के अंदर रह रहे 130 करोड़ लोगों से कोई वास्ता नहीं है। कांग्रेस और उसके साथी, शहरों में रहने वाले कुछ पढ़े लिखे नक्सली- अर्बन नक्सल, ये अफवाह फैला रहे हैं कि सारे मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। कुछ तो अपनी शिक्षा की कद्र करिए। एक बार पढ़ तो लीजिए नागरिकता संशोधन एक्ट है क्या? अब भी जो भ्रम में हैं, मैं उन्हें कहूंगा कि कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गई डिटेंशन सेंटर की अफवाह सरासर झूठ हैं। जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, उनसे नागरिकता कानून और एनआरसी दोनों का ही कोई लेना-देना नहीं है।
झूठ फैलाने से पहले गरीबों पर दया करो
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग सीएए को गरीबों के खिलाफ ही बता रहे हैं, कह रहे हैं कि जो लोग आएंगे वो यहां के गरीबों का हक छीन लेंगे। अरे झूठ फैलाने से पहले कम से कम गरीबों पर तो दया करो भाई। ये एक्ट उन लोगों पर लागू होगा जो बरसों से भारत में ही रह रहे हैं। किसी नए शरणार्थी को इस कानून का फायदा नहीं मिलेगा। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से आए लोगों को सुरक्षा देने के लिए ये कानून है।
वहां बेटियों के साथ होता है अत्याचार
शरणार्थियों को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब इन दलितों के जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर करने का काम मोदी सरकार कर रही है तो आपके पेट में चूहे क्यों दौड़ रहे हैं। पाकिस्तान से जो शरणार्थी आए हैं उसमें से अधिकतर दलित परिवार से हैं। वहां आज भी दलितों के साथ दुर्व्यवहार होता है। वहां बेटियों के साथ अत्याचार होता है, जबरन शादी करके उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। ये इसलिए किया जाता है कि उनकी आस्था, पूजा पद्धति अलग है। ऐसे शोषण के कारण ही वो भारत आए और देश के अलग अलग कोनों में रह रहे हैं।
आपको क्यों नहीं दिखी इन दलितों की तकलीफ
शरणार्थियों के दर्द को बयां करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं दलित राजनीति करने का दावा करने वालों से भी पूछना चाहता हूं कि आप इतने वर्षों से चुप क्यों थे, आपको इन दलितों की तकलीफ कभी क्यों नहीं दिखाई दी। आज जब इन दलितों के जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर करने का काम मोदी सरकार कर रही है तो आपके पेट में चूहे क्यों दौड़ रहे हैं। रिफ्यूजी का जीवन क्या होता है, बिना कसूर के अपने घरों से निकाल देने का दर्द क्या होता है, ये दिल्ली से बेहतर कौन समझ सकता है। यहां का कोई कोना ऐसा नहीं है, जहां बंटवारे के बाद किसी रिफ्यूजी का और बंटवारे से अल्पसंख्यक बने भारतीय का आंसू ना गिरा हो।
ममता दीदी सीधे कोलकाता से वियना पहुंच गईं
महात्मा गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख साथियों को जब लगे कि उन्हें भारत आना चाहिए तो उनका स्वागत है। ये रियायत तब की भारत की सरकार के वादे के मुताबिक है। पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ साल पहले तक यही ममता दीदी संसद में खड़े होकर गुहार लगा रहीं थीं कि बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को रोका जाए, वहां से आए पीड़ित शरणार्थियों की मदद की जाए। संसद में स्पीकर के सामने कागज फेंकती थी।
सीएए का विरोध करने वालों के हाथ में तिरंगा देखकर सुकून मिलता है
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के हाथ में जब ईंट-पत्थर देखता हूं तो मुझे तकलीफ होती है। लेकिन मेरी सोच अलग है। जब उनके हाथ में हिंसा के साधन देखता हूं तो मुझे तकलीफ होती है। परंतु जब उन्हीं में से कुछ के हाथ में तिरंगा देखता हूं, तो सुकून भी होता है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि एक बार जब हाथ में तिरंगा आ जाता है तो वो फिर कभी हिंसा का, अलगाव का, बांटने की राजनीति का समर्थन नहीं कर सकता। मुझे पूरा विश्वास है कि हाथ में थमा यह तिरंगा इन लोगों को हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ, हथियार उठाने वालों के खिलाफ, आतंकवादी हमले करने वालों के खिलाफ भी आवाज उठाने के लिये प्रेरित करेगा।