बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पीएम नरेंद्र मोदी की ओर खिंचते जा रहे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दोपहर भोज में गैर हाजिर रहे नीतीश शनिवार को पीएम मोदी के लंच में शामिल हुए। इस दौरान नीतीश कुमार ने पीएम मोदी से मुलाकात कर बातचीत भी की। हालांकि मोदी से मिलकर लौटे नीतीश ने कहा इस मुलाकात पर ज्यादा राजनीति नहीं होनी चाहिए। नीतीश ने इसे साधारण मुलाकात बताया, कहा- गंगा में सिल्ट की समस्या को प्रधानमंत्री के सामने रखा गया, जिस पर उन्होंने निदान का आश्वासन दिया है। वहीं सोनिया की बैठक में न जाने के मुद्दे पर नीतीश ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उनसे हुई मुलाकात में राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर चर्चा हो गई थी। वहीं लालू और उनके परिवार पर लगे आरोपों पर नीतीश ने यह कहकर टिप्पणी से इंकार कर दिया कि वो आरोपों पर टिप्पणी नहीं करते।
हालांकि इस सारे वाक्ये से इतर एक बात यह भी महत्वपूर्ण है कि पिछले कुछ समय से पीएम मोदी के प्रति नीतीश कुमार के रुख में नरमी देखने को मिली है। जिसके बाद भाजपा और जेडीयू के बीच राजनीति के नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। पीएम मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के सम्मान में लंच दिया। जिसमें नीतीश कुमार शामिल हुए जबकि उनको सोनिया गांधी ने भी आमंत्रित किया था लेकिन शुक्रवार को नीतीश वहां नहीं गए।
वैसे ये जानना भी जरूरी है कि नीतीश और मोदी के बीच इस अदावत की शुरूआत भी नीतीश कुमार के एक कदम के बाद हुई थी। सात साल पहले 2010 में एक रात्रिभोज के कैंसल होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच अचानक कटुता बढ़ गई थी। इस पूरे बदलाव पर गहन नजर डालेंगे तो पाएंगे कि पीएम मोदी और नीतीश के मिलने-बिछड़ने की कहानी लंच-डिनर पर शुरू और खतम होती है।
2010 के एक डिनर के दौरान ही आई थी खटास
nitish kumar and PM modi
थोड़ा पीछे नजर डाले तो पाएंगे कि 2010 के एक डिनर के दौरान ही पीएम मोदी और नीतीश कुमार के संबंधों में खटास आई थी। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भाग लेने पटना में थे। नीतीश कुमार उस दौरान भाजपा के सहयोगी के रूप में राजग के अहम सदस्य थे। कुमार ने उस समय भाजपा के बड़े नेताओं को डिनर पर आमंत्रित किया था।
इसी दौरान पीएम मोदी और नीतीश के बीच अलगाव शुरु हुआ। दरअसल 2010 की कोसी आपदा के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को 5 करोड़ रुपए बतौर सहायता राशि दी थी। इस पर मोदी ने अखबारों में बड़ा विज्ञापन भी दिया था। कुमार इससे नाराज हो गए और इसको बिहार की बेइज्जती तक कह डाला। वह इतने नाराज थे कि उन्होंने रात्रिभोज कैंसल कर दिया। क्योंकि भाजपा के बड़े नेताओं को नरेंद्र मोदी को छोड़ना उस समय संभव नहीं था। कुमार ने पांच करोड़ के चेक को मोदी को लौटा दिया था।
मोदी ने कुमार के इस कदम की आलोचना की तथा नीतीश के इस व्यवहार को एक तरह से छुआछूत से जोड़ा। लेकिन अब दौर बदल गया है। मोदी और कुमार दोबारा साथ होने लगे हैं। मोदी के पीएम बनने के दो साल बाद कुमार राजग की ओर खिंचने लगे। उन्होंने बिहार के लिए विशेष पैकेज मांगा, पीएम मोदी से मुलाकात की। कुमार ने नमामि गंगे योजना की सराहना की।
मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी की भी सराहना की
नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी की भी सराहना की। जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते रहे। पूरा विपक्ष नोटबंदी पर रो रहा था लेकिन कुमार ने इसकी खुले मंच से सराहना की। पटना में गत जनवरी में 350 प्रकाश पर्व में कुमार और पीएम मोदी की पटना साहिब गुरुद्वारा में मुलाकात हुई। दोनों ने इस दौरान भगवा पगड़ी पहनी थी।
राजग के पास राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए जरूरी 50 फीसदी से कुछ वोट कम हैं। विपक्ष राजग को चुनाव में परास्त कर अपने आगे की रणनीति को और पुख्ता करना चाहता है। लेकिन नीतीश का मोदी की ओर झुकाव इसमें बाधा खड़ी कर सकता है।
सोनिया के लंच पर नहीं आए नीतीश पर राजद नेता रघुवंश प्रसाद यादव ने यहां तक कह डाला कि नीतीश कुमार को पीएम मोदी का लंच ज्यादा जायकेदार लगता है।
लालू प्रसाद यादव ने हालांकि कहा कि नीतीश अपने आधिकारिक कार्य में व्यस्त हैं। लेकिन रिकार्ड कहता है कि शुक्रवार को कैबिनेट बैठक का ही कार्यक्रम था और वह भी शाम 5 बजे पटना में होनी थी।