दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान क्षेत्रीय हालात पर भी विस्तृत चर्चा की गई। भारत और ईरान ने एक शांतिपूर्ण, स्थिर, समृद्ध और बहुलवादी अफगानिस्तान के जरूरत पर भी जोर दिया। राष्ट्रपति रूहानी के साथ साझा प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद से मुक्त विश्व चाहते हैं। दोनों उन ताकतों का विस्तार रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो आतंकवाद, चरमपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराधों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराधों को प्रोत्साहित करती हैं।
वहीं राष्ट्रपति रूहानी ने कहा, हम आतंकवाद और कट्टरपन से लड़ने के लिए कृत-संकल्प हैं। उन्होंने कहा, क्षेत्रीय संघर्ष कूटनीति और राजनीतिक पहल से हल किए जाने चाहिए। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति ने किसी क्षेत्रीय विवाद का जिक्र नहीं किया।
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति रूहानी की यात्रा दर्शाती है कि कैसे दोनों देश संपर्क समेत आपसी महत्व वाले मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार को ‘गोल्डन गेटवे’ बताया। पीएम ने कहा कि इसके विकास से जमीन से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचा जा सकेगा। पीएम ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए ईरानी नेता के नेतृत्व की भी प्रशंसा की। इससे पहले, राष्ट्रपति रूहानी का राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया गया। शनिवार सुबह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
चाबहार पर अहम करार
दोनों देशों के बीच जिन नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, उनमें ईरान पोर्ट एवं मैरीटाइम आर्गेनाइजेशन और इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) के बीच एक पट्टा अनुबंध शामिल है। इसमें 18 महीने के लिए चाबहार के पहले चरण में शामिल शाहिद बाहिस्ती पोर्ट की मौजूदा सुविधाओं का संचाल भारतीय कंपनी को देना शामिल है। अन्य करार में दोहरे कराधान से बचाव और आय पर टैक्स के संबंध में राजकोषीय चोरी की रोकथाम, प्रत्यर्पण संधि की बहाली, राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा छूट, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और व्यापार सुधारने के उपायों के लिए विशेष समूह बनाना शामिल है। इन नौ समझौतों के अलावा राष्ट्रपति रूहानी की यात्रा से इतर चार और समझौते पर भी हस्ताक्षर होने हैं।