प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपानीत राजग में शामिल 32 दलों की बैठक में भविष्य की रणनीति के साथ-साथ राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों पर गंभीर चर्चा हुई। इस बैठक में भाजपा की ओर से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद चेहरे पर तो नहीं मगर चुनाव में एकजुटता बनाए रखने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इन चुनावों पर सहयोगी दलों का मन टटोला। दरअसल भाजपा की योजना इन दोनों ही पदों पर अपनी पसंद के उम्मीदवारों पर सहयोगी दलों का रुख टटोलने की थी।
पार्टी की योजना सहयोगी दलों में से महत्वपूर्ण चुनिंदा दलों को अपने मनपसंद उम्मीदवारों का प्रस्तावक बनाना है। भगवा पार्टी की अक्सर खिंचाई करने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और आंध प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में प्रधानमंत्री ने सहयोगी दलों के बीच परस्पर सहयोग और बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया। भाजपा सूत्रों ने बताया कि बैठक में सहयोगी दलों की ताकत और राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा हुई। इस दौरान जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राजग के सहयोगी दलों के बीच एकजुटता पर जोर दिया।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में वोट के लिहाज से राजग बहुमत के बेहद करीब है। भाजपा को उम्मीद है कि रविवार को हुए उपचुनावों के नतीजे आने के बाद उसकी शक्ति और बढ़ेगी। वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद राजग की यह दूसरी बैठक थी। भाजपा अध्यक्ष शाह ने इस बैठक के लिए सभी सहयोगी दलों को न्यौता दिया था। हालांकि सूत्रों ने राष्ट्रपति चुनाव को बैठक के एजेंडे में शामिल होने से इनकार किया है।