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अर्थव्यवस्था के बचाव में उतरे मोदी, कहा- UPA सरकार में 8 बार 5.7 से कम रही विकास दर

Thu, 05 Oct 2017 09:53 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था का कबाड़ा होने की आलोचना झेल रही केंद्र सरकार के बचाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि देश में आर्थिक मंदी सिर्फ निराशावादियों के दिमाग की उपज है।
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पिछली सरकार में कम से कम आठ बार विकास दर 5.7 फीसदी से नीचे गई, तब इन निराशावादियों को कुछ नजर नहीं आया, लेकिन उनकी सरकार में पहली बार किसी एक तिमाही में विकास दर में कमी क्या आई, उन लोगों ने आसमान ही सिर पर उठा लिया। ऐसे आलोचक देश हित नहीं, किसी और का हित साध रहे हैं।

विज्ञान भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। यह सही है कि उसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है और सरकार उसे गति देने के लिए बड़े फैसले करने को तैयार है। उन फैसलों से देश जल्दी ही विकास के नए मुकाम पर पहुंच जाएगा।
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आलोचकों को सिर्फ दो तिमाही की सुस्ती दिख रही है लेकिन यह नजर नहीं आ रहा है कि पिछली सरकार में महंगाई की दर 10 फीसदी थी जो घटकर 2.5 फीसदी रह गई है। चालू खाता घाटा 4 से घटकर एक फीसदी हो गया है और राजकोषीय घाटा 5.7 से कम होकर 4.5 फीसदी पर पहुंच गया है। आलोचक भूल गए हैं कि उनकी सरकार भारत को सबसे कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं की कतार से निकालकर सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार कर चुके हैं। 

पढ़ें- 125 करोड़ भारतीयों के सहयोग के बिना हजार गांधी भी ‘स्वच्छ भारत’ नहीं कर सकते: मोदी

दूर करेंगे जीएसटी की दुश्वारियां

मोदी ने कहा कि जीएसटी पर अमल को तीन महीने हो गए हैं। सरकार इसके रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए समीक्षा कर रही है। इसकी सभी दुश्वारियों को दूर करने के लिए हरसंभव बदलाव किए जाएंगे। उनकी सरकार में पहली बार ईमानदारी को प्रीमियम मिल रहा है। इसलिए सभी व्यापारी निडर होकर काम करें। सरकार उनके गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ेगी यानी कोई व्यापारी अगर अपने व्यवसाय को साफ-सुथरा करना चाहता है तो उसके पुराने रिकॉर्ड नहीं खंगाले जाएंगे।

भ्रष्टाचार मुक्ति दिवस
प्रधानमंत्री ने कहा कि 8 नवंबर को नोटबंदी लागू करने की तारीख को भ्रष्टाचार मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह नोटबंदी का ही नतीजा है कि तीन लाख से ज्यादा शेल (सिर्फ कागजों पर चलाई जा रही) कंपनियों की पहचान की गई और उनमें से दो लाख से ज्यादा को बंद कर दिया गया। अब कोई भी काला धन पैदा करने से पहले 50 बार सोचेगा। 

आलोचनाओं का दिया जवाब
1-आर्थिक विकास 5.7 फीसदी के चिंताजनक स्तर पर
  - पिछली सरकार में आठ बार विकास दर इससे भी कम थी
2- हालात सुधारने के लिए कुछ नहीं कर रही सरकार
  - सरकार इसके लिए बड़े फैसले लेने को तैयार
3- बिना सोचे-समझे लागू किया गया जीएसटी
 - इसकी समीक्षा करेंगे और बाधाओं को दूर करेंगे
4- नोटबंदी से कुछ भी हासिल नहीं हुआ
- अब काला धन पैदा करने वाले 50 बार सोचेंगे
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मनमोहन बनाम मोदी सरकार की तुलना

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मनमोहन बनाम मोदी सरकार की तुलना

पिछली सरकार  (आखिरी तीन साल में)                मोदी सरकार (तीन साल में)
महंगाई दर- 10 फीसदी                                     2.5 फीसदी
विदेशी निवेश 30 हजार करोड़ डालर                   40 हजार करोड़ डालर
80 हजार किमी ग्रामीण सड़क का निर्माण             1 लाख 20 हजार किमी सड़क का निर्माण
15 हजार किमी नेशनल हाई वे का निर्माण           34 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण
भूमि अधिग्रहण और व निर्माण पर 93 हजार करोड़    इसी मद में 1 लाख 83 हजार करोड़
रेलवे: 11 सौ किमी नई रेल लाइन                     रेलवे: 21 सौ किमी रेल लाइन
रेल दोहरीकरण: 13 सौ किमी                          रेल दोहरीकरण: 26 सौ किमी
रिन्यूवल ऊर्जा पर 4 हजार करोड़ खर्च                 10 हजार करोड़ खर्च
सस्ते आवास 15 हजार करोड़ की परियोजना           1 लाख 53 हजार करोड़ की परियोजना


नीति, रीति और नीयत से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा

संपूर्ण निवेश 53 फीसदी
इलेक्ट्रीक उपकरण 52 फीसदी
सौर ऊर्जा   49 फीसदी
टेक्सटाइल  45 फीसदी
ऑटोमोबाइल सेक्टर 44 फीसदी (1980 से उदारीकरण के बावजूद )

बाजार बेजार नहीं

कामर्शियल वाहनों की बिक्री 23 फीसदी बढ़ी
दोपहिया वाहनों की बिक्री 14 फीसदी बढ़ी
घरेलू हवाई यात्रा में 14 फीसदी की वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय हवाई माल ढुलाई में 16 फीसदी की वृद्धि
फोन-मोबाइल उपभोक्ताओं की तादाद 14 फीसदी बढ़ी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ट्रैक्टर की खरीदारी 34 फीसदी बढ़ी
पर्सनल लोन और बीमा के क्षेत्र में निवेश बढ़ा

             
युवाओं को रोजगार और गरीबों- मध्यम वर्ग का कल्याण
30 करोड़ जनधन खाते
26 करोड़ से ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित जिसकी कीमत में अंतर से 6.5 करोड़ की बचत
बिजली मद में 14 हजार करोड़ की बचत  
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