देश में अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) व चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष या लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता और एक केंद्रीय मंत्री की सदस्यता वाली नियुक्ति कमेटी के जरिये की जाएगी। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा-शर्तों से संबंधित विधेयक दोनों सदनों से पास हो गया। विधेयक को लोकसभा ने बृहस्पतिवार को मंजूरी दी। राज्यसभा ने पिछले हफ्ते ही मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून अस्तित्व में आ जाएगा। नया कानून चुनाव आयोग अधिनियम-1991 की जगह लेगा।
केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि चुनाव आयोग कानून-1991 में पद की अर्हता और सर्च कमेटी से जुड़ी बातें नहीं थीं। नए बिल में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, पद के लिए अर्हता, सर्च कमेटी, कार्यकाल, वेतन, त्यागपत्र और पद से हटाने, छुटि्टयों और पेंशन से जुड़ी सेवा शर्तें तय की गई हैं। विधेयक में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की खोज के लिए विधि मंत्री की अगुवाई में तीन सदस्यीय सर्च कमेटी की स्थापना का भी प्रावधान है। पहले इस कमेटी की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव के पास थी।
दूरसंचार विधेयक भी पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बन जाएगा कानून
नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में किसी भी टेलीकॉम सर्विस या नेटवर्क को संभालने, प्रतिबंधित करने या निलंबित करने की अनुमति देने वाले दूरसंचार विधेयक-2023 को राज्यसभा ने भी बृहस्पतिवार को पारित कर दिया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। यह विधेयक भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885, भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम 1933 और टेलीग्राफ तार (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम-1950 की जगह लेगा। संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, यह नये भारत की आकांक्षाओं वाला कानून है।
अस्थायी नियंत्रण की अनुमति विधेयक केंद्र को आपात स्थिति में किसी भी दूरसंचार सेवा या नेटवर्क को अस्थायी तौर पर नियंत्रित करने का अधिकार देता है। विधेयक में उपभोक्ताओं को सिम कार्ड जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से बायोमीट्रिक पहचान करने को कहा गया है। विधेयक में फर्जी सिम लेने पर 3 साल जेल और 50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
प्रेस की आजादी और कारोबार से जुड़ा विधेयक पारित
संसद ने प्रकाशन उद्योग को नियंत्रित करने वाले ब्रिटिश काल के प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम-1867 के कानून को निरस्त करते हुए प्रेस एवं पत्र-पत्रिका पंजीकरण विधेयक, 2023 पारित कर दिया। विधेयक मानसून सत्र में राज्यसभा से पहले ही पारित हो चुका है। इसमें ऑनलाइन प्रणाली के जरिये पत्र-पत्रिकाओं के शीर्षक आवंटन और पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल एवं समकालिक बना दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, स्वामित्व पंजीकरण प्रक्रिया में कभी-कभी 2-3 साल लग जाते थे, अब 60 दिनों में पूरी होगी। पहले समाचार पत्रों को आठ चरणों की पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब एक बटन के क्लिक पर हो सकेगा।