देश के युवाओं को टॉप कंपनियों में काम करने का एक्सपीरियंस दिलाने के लिए भारत सरकार ने पीएम इंटर्नशिप स्कीम शुरू की है। इस स्कीम से न सिर्फ युवाओं को अपनी स्किल डेवलप करने का मौका मिलेगा बल्कि इसके जरिए भविष्य में उनके लिए नौकरी की संभावनाएं भी बढ़ेगी। अब सरकार प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने इसके लिए तैयारी शुरु कर दी है। फिलहाल इंटर्नशिप योजना को परीक्षण कार्यक्रम के तौर पर लागू किया गया है। इसी बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने इस योजना को लेकर कई सवाल खड़े किए है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि, मोदी सरकार आज भारी टैलेंट डेफ़िसिट (प्रतिभा के अभाव) से जूझ रही है और इन योजनाओं का क्रियान्वयन बेहद खराब रहा है। महज सात प्रतिशत छात्रों ने इस योजना के तहत इंटर्नशिप शुरू की। इनमें भी कई इंटर्न असंतोष के चलते बीच में ही छोड़कर चले गए।
इस मामले की जानकारी रखने वाले सरकारी सूत्रों का कहना है कि,केंद्र सरकार कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) से जुड़ी सभी कंपनियों को इस योजना में भाग लेने की अनुमति दे सकती है। फिलहाल इस योजना का दायरा केवल शीर्ष 500 कंपनियों तक ही सीमित है। सूत्रों का कहना है कि, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और पॉलिटेक्निक से आने वाले आवेदकों को प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में समायोजित करने के लिए उम्र की सीमा भी कम की जा सकती है। सरकार द्वारा अभी परीक्षण के तौर पर शुरू किए गए दो कार्यक्रमों में से एक अभी भी जारी है। इन कार्यक्रमों से मिली सबक को इंटर्नशिप योजना में शामिल किया जाएगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार सितंबर तक प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को पूरी तरह शुरू कर सकती है। उसमें परीक्षण के तौर पर शुरू किए गए कार्यक्रमों से मिली जानकारियों को समाहित किया जाएगा।
इस बीच सरकार की इस महत्वाकांशी स्कीम को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल खड़े किए है। विपक्षी दल कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना बुरी तरह विफल रही है क्योंकि सरकार के पास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जरूरी प्रतिभाओं का अभाव है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जातिगत जनगणना पर व्यापक सार्वजनिक परामर्श किया जाए क्योंकि अगर इसे मोदी सरकार के हवाले छोड़ दिया गया, तो वह इसमें भी जरूर गड़बड़ी पैदा कर देगी।
कांग्रेस नेता रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया, जैसे-तैसे सत्ता में वापसी के बाद से, विचारहीन और थकी हुई मोदी सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के न्याय पत्र (लोकसभा चुनाव का घोषणापत्र) से प्रेरणा लेना शुरू कर दिया। 4 जून 2024 के बाद मोदी सरकार ने एंजेल टैक्स वापस लेने, रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं लागू करने, इंटर्नशिप योजना शुरू करने और जातिगत जनगणना कराने पर सहमति व्यक्त की है।
उन्होंने दावा किया कि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार आज भी भारी टैलेंट डेफ़िसिट (प्रतिभा के अभाव) से जूझ रही है और इन योजनाओं का क्रियान्वयन बेहद खराब रहा है। उनका कहना है, अब सामने आई रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि बजट में घोषित इंटर्नशिप योजना भी बुरी तरह विफल रही है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल भी बेहद कम हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शुरू में तय किए गए 2,000 करोड़ रुपये के बजट को घटाकर 380 करोड़ रुपये कर दिया गया और उसमें भी फरवरी 2025 तक केवल 21.1 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके। यह आंशिक रूप से कार्यक्रम में कम रुचि के कारण है। विभिन्न कंपनियों ने इंटर्नशिप के 82,000 प्रस्ताव दिए, लेकिन केवल 28,000 छात्रों ने इन्हें स्वीकार किया और उनमें से भी सिर्फ़ 8,725 ने वास्तव में ज्वॉइन किया। यानी महज सात प्रतिशत छात्रों ने इस योजना के तहत इंटर्नशिप शुरू की। कई इंटर्न तो असंतोष के चलते बीच में ही छोड़कर चले गए। यह न केवल इस कार्यक्रम की विश्वसनीयता, बल्कि सरकार की अपनी प्रमुख योजनाओं को लागू करने की क्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार ने 2025—26 में बढ़ाया है बजट, युवा नहीं दिखा रहे रुचि
केंद्र सरकार वर्ष 2025-26 के बजट में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए आवंटन को वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान 380 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,831.07 करोड़ रुपये किया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में इस योजना की घोषणा की थी। परीक्षण कार्यक्रम के दौरान स्थान, यात्रा एवं इंटर्नशिप अवधि जैसे तमाम कारकों के कारण इस योजना के प्रति इंटर्न की खास रुचि नहीं दिखी है। पहले दौर के परीक्षण कार्यक्रम में 1,27,000 से अधिक अभ्यर्थियों को इंटर्नशिप प्रदान की गईं और दूसरे चरण में करीब 1,15,000 को इसकी पेशकश मिली। एक स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दिसंबर से अब तक पेशकश स्वीकार करने वाले 28,000 से अधिक उम्मीदवारों में से केवल 8,700 इंटर्नशिप में शामिल हुए।