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PM-eBus Sewa: किन शहरों को मिलेगा इलेक्ट्रिक बसों का लाभ, क्या है सरकार की योजना? जानें इसके बारे में सब कुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 16 Aug 2023 06:49 PM IST

सार

PM-eBus Sewa: बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर सिटी बस चलाने के लिए एक बस योजना पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दे दी है। योजना के माध्यम से 10,000 ई-बसें चलाई जाएंगी। योजना तीन लाख और उससे अधिक आबादी वाले शहरों को कवर करेगी।
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पीएम ई-बस सेवा - फोटो : AMAR UJALA
आने वाले समय में देश के कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। दरअसल, बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 169 शहरों में ई-बस चलाने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम 'पीएम ई-बस सेवा' रखा है जिस पर 77,613 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आइए जानते हैं पीएम ई-बस सेवा योजना के बारे में सब कुछ...
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पीएम ई-बस सेवा - फोटो : AMAR UJALA
आने वाले समय में देश के कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। दरअसल, बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 169 शहरों में ई-बस चलाने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम 'पीएम ई-बस सेवा' रखा है जिस पर 77,613 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आइए जानते हैं पीएम ई-बस सेवा योजना के बारे में सब कुछ...

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर - फोटो : social media
पहले जानते हैं केंद्र सरकार ने एलान क्या किया है?
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर सिटी बस चलाने के लिए एक बस योजना पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पीएम ई-बस सेवा योजना के माध्यम से 10,000 ई-बसें चलाई जाएंगी। 

इस योजना की अनुमानित लागत 57,613 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये की मदद केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। यह योजना 10 वर्षों तक बस संचालन में आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी।

इलेक्ट्रिक बस - फोटो : सोशल मीडिया
योजना में क्या-क्या है?
पीएम ई-बस सेवा योजना को दो खंडों (खंड ए और खंड बी) में बांटा गया है। खंड ए में 169 शहरों में सिटी बस सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वीकृत बस योजना से डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और अपग्रेडेशन के लिए मदद मिलेगी। वहीं ई-बसों के लिए बिहाइंड द मीटर विद्युत इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सबस्टेशन आदि का निर्माण भी संभव होगा।

योजना के खंड बी में 181 शहरों में ग्रीन अर्बन मोबिलिटी पहल (जीयूएमआई) को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसमें बस की प्राथमिकता, बुनियादी सुविधा, मल्टीमॉडल इंटरचेंज सुविधाएं, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) आधारित स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली, चार्जिंग हेतु बुनियादी सुविधाएं आदि जैसी हरित पहल की परिकल्पना की गई है।

इस खंड में बसों के संचालन के लिए केंद्र सरकार आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी। योजना के तहत, राज्य अथवा शहर इन बस सेवाओं के संचालन और बस ऑपरेटरों को भुगतान करेंगे। वहीं केंद्र सरकार प्रस्तावित योजना में सब्सिडी प्रदान करके इन बसों के संचालन में मदद करेगी।

बनारस में इलेक्ट्रिक बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
योजना का उद्देश्य क्या है?
केंद्र की मानें तो पीएम ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य पहुंच से वंचित लोगों तक परिवहन व्यवस्था सुविधाजनक बनाना है। यह योजना 2011 की जनगणना के अनुसार तीन लाख और उससे अधिक आबादी वाले शहरों को कवर करेगी। कवर होने वाले शहरों में केंद्र शासित प्रदेशों, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों की सभी राजधानियां शामिल हैं।  योजना के तहत उन शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां कोई सुव्यवस्थित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

नितिन गडकरी ने मुंबई में इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बस की शुरूआत की - फोटो : Twitter
योजना के लाभ क्या होंगे?
यह योजना ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देगी और सबस्टेशन अधोसंरचना के लिए पूर्ण सहायता प्रदान करेगी। शहरों को ग्रीन अर्बन मोबिलिटी पहल के तहत चार्जिंग सुविधाओं के विकास के लिए भी मदद दी जाएगी। इससे न केवल अत्याधुनिक, ऊर्जा कुशल इलेक्ट्रिक बसों बढ़ेंगी बल्कि ई-मोबिलिटी क्षेत्र में नवाचार के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला भी विकसित होगी।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने से ध्वनि और वायु प्रदूषण कम होगा और कार्बन उत्सर्जन पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा बस-आधारित सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ने के कारण जो बदलाव आएगा, उससे ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में कमी आएगी। यानी बदलती जलवायु परिवर्तन गतिविधियों के बीच यह योजना पर्यावरण की सेहत के लिए काफी मददगार सबित होगी।

योजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 
इस योजना के तहत सिटी बस संचालन में लगभग 10,000 बसें चलाई जाएंगी जिससे 45,000 से 55,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
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