प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फाइल फोटो)
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राजनीतिक तल्खी और मुद्दों पर सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच विरोध के साथ राज्यसभा का 250वां सत्र समाप्त हो गया लेकिन अंतिम दिन राजनीतिक परंपरा टूटती दिखी। वरिष्ठ नेताओं की आपस में नजरें तो मिलीं लेकिन इस बार हाथ नहीं मिले।
आमतौर पर सत्रावसान पर प्रधानमंत्री अपने स्थान से उठकर विपक्ष की सीटों की ओर जाते हैं और हाथ मिलाने के साथ विपक्ष के नेताओं का अभिवादन स्वीकार करते हैं। हालांकि जिस समय प्रधानमंत्री सदन में आए थे विपक्ष की ओर से सदस्यों ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया।
राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे। सभापति वैंकेया नायडू ने पूरे सत्र का लेखाजोखा पेश कर सत्रावसान की घोषणा की। वंदेमातरम की धुन पर सभी सदस्यों ने खड़े होकर एक स्वर में उसका गान किया।
सभापति उठकर अपने कक्ष में चले गए और प्रधानमंत्री अपने साथी मंत्रियों और सांसदों से बातचीत करने लगे। सामने विपक्ष की अग्रिम पंक्ति में बैठ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा अपने-अपने स्थान पर कुछ देर खड़े रहे।
कुछ देर अपने मंत्रियों से बात करने के बाद पीएम ने सभापति कक्ष की ओर रुख किया और चले गए। शायद विपक्ष के नेताओं ने भी मौके की नजाकत को भांपते हुए सदन से बाहर जाने का फैसला कर लिया।