पीएम केयर्स फंड को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को हरी झंडी मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने को उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें पीएम केयर्स फंड की राशि को कोरोना महामारी के मद्देनजर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फंड (एनडीआरएफ) में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि पीएम केयर्स फंड की राशि एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इसकी राशि को उचित जगह ट्रांसफर करने के लिए स्वतंत्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एनडीआरएफ एक वैधानिक निधि है, जिसे आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 के तहत बनाया गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, संगठन या कॉरपोरेट एनडीआरएफ में योगदान करने के लिए स्वतंत्र हैं, इस पर कोई वैधानिक बाधा नहीं हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पीएम केयर्स फंड एक अलग चैरिटी है जिसे पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया है। ऐसे में पीएम केयर्स फंड को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि नई राष्ट्रीय आपदा राहत योजना बमाने की कोई जरूरत नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि पीएम केयर्स फंड स्वैच्छिक फंड है जबकि एसडीआरएफ फंड बजट आवंटन के दायरे में हैं। वहीं याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल की ओर से कहा गया था कि पीएम केयर्स फंड एक फ्रॉड है। संवैधानिक फ्रॉड है। पीएम केयर्स फंड का गठन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। एनडीआरएफ का ऑडिट सीएजी द्वारा होता है लेकिन सरकार कह रही है कि पीएम केयर्स फंड का ऑडिट प्राइवेट ऑडिटर द्वारा कराया जाएगा।
क्या है पीएम केयर्स फंड
कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।
क्या है पीएम केयर्स फंड का उद्देश्य
- संकट की स्थिति, चाहे प्राकृतिक हो या कोई और, में प्रभावित लोगों की पीड़ा को कम करने और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं एवं क्षमताओं को हुए भारी नुकसान में कमी/नियंत्रण करने, इत्यादि के लिए त्वरित और सामूहिक कदम उठाना जरूरी हो जाता है। अत: अवसंरचना और संस्थागत क्षमता के पुनर्निर्माण/विस्तार के साथ-साथ त्वरित आपातकालीन कदम उठाना और समुदाय की प्रभावकारी सुदृढ़ता के लिए क्षमता निर्माण करना आवश्यक है।
- प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, पैसे के भुगतान हेतु अनुदान प्रदान करने या ऐसे अन्य कदम उठाने के लिए पैसे के भुगतान के लिए न्यासी बोर्ड द्वारा आवश्यक समझा जा सकता है।
- किसी अन्य गतिविधि को करने के लिए, जो उपरोक्त वस्तुओं के साथ असंगत नहीं है।