असम सरकार के सरकारी मदसरों को साधारण स्कूलों में बदलने के कानून पर बवाल मचा हुआ है। असम सरकार के इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, असम रीअपीलिंग एक्ट, 2020 के तहत दाखिल की गई है। दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार के मदरसा कानून को बरकरार रखा था। इस कानून के तहत सरकार राज्य के सरकारी सहायता प्राप्त सभी मदरसों को स्कूलों में तब्दील करना चाहती है।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कर दी थी रिट याचिका खारिज
गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने चार फरवरी को राज्य सरकार के मदरसों को स्कूल में तब्दील किए जाने वाले कानून की वैधता को चुनौती देने वाली रिट खारिज कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने कहा था कि राज्य द्वारा वित्त पोषित मदरसे अल्पसंख्यक संस्थान हैं और अल्पसंख्यकों द्वारा स्थापित और प्रशासित किए गए थे, यह केवल एक दावा है जिसका कोई आधार नहीं है और इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है। बेंच ने यह भी कहा था कि राज्य की विधायी और कार्यकारी कार्रवाई द्वारा लाए गए परिवर्तन केवल सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों के लिए हैं, जो सरकारी स्कूल हैं, न कि निजी या सामुदायिक मदरसों के लिए।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
4 फरवरी को आए गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता अदील अहमद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करते हुए मोहम्मद इमाद उद्दीन बरभुइया और अन्य ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।
क्या है असम निरसन अधिनियम 2020?
दरअसल, असम सरकार असम निरसन अधिनियम 2020 के जरिए सभी सरकारी मदरसों को उच्च प्राथमिक, उच्च और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तित कर रही है। असम निरसन विधेयक, 2020 से वर्तमान के दो मौजूदा अधिनियमों को निरस्त हो जाएंगे। ये असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम, 1995 और असम मदरसा शिक्षा (कर्मचारियों की सेवा का प्रांतीयकरण और मदरसा शैक्षणिक संस्थानों का पुन: संगठन) अधिनियम, 2018 हैं। इस नए कानून में राज्य बोर्डों के तहत संचालित निजी मदरसों को भी शामिल किया गया है, हालाँकि वे मदरसे जो निजी तौर पर संचालित है परंतु किसी भी राज्य बोर्ड के अधीन नहीं हैं, इस विधेयक के दायरे से बाहर हैं। इसके तहत सभी मदरसों को उच्च प्राथमिक, उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में तब्दील किया जाएगा लेकिन इनमें कार्यरत शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के दर्जे, वेतन, भत्तों एवं सेवा शर्तों में बदलाव नहीं होगा।