कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में प्लाज्मा थेरैपी का असर पता करने एक और चिकित्सीय अध्य्यन सामने आया है। इसमें संक्रमित मरीज को प्लाज्मा देने के बाद उसके गंभीर अवस्था में पहुंचने या फिर मौत की आशंका को रोकने में कम प्रभाव मिला है।
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्य्यन में 464 मरीजों को प्लाज्मा दिया गया था। इससे पहले आईसीएमआर ने भी 400 से अधिक मरीजों पर किए अध्य्यन में प्लाज्मा थेरैपी को कारगर नहीं बताया था। दोनों के परिणाम लगभग एक जैसे मिले हैं।
अप्रैल से जुलाई के बीच भर्ती 464 संक्रमित मरीजों को अध्य्यन में शामिल किया गया था। इसमें से 239 मरीजों को दो बार प्लाज्मा दिया गया। जबकि 229 मरीजों को दूसरे समूह में रखा जाए जिन्हें अन्य चिकित्सीय उपचार दिए गए। ठीक एक महीने बाद उन्हें प्लाज्मा दिया गया था, उनमें से 44 मरीज या तो गंभीर स्थिति में मिले या फिर मौत हो गई।
तमिलनाडु स्थित राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने अध्य्यन में पाया है कि प्लाज्मा थेरैपी देने से मरीजों में संक्रमण के लक्षण कम जरूर हो रहे हैं। करीब सात दिन में ही इनके लक्षणों में कमी दर्ज की जा रही है।
गोवा में जारी रहेगी प्लाज्मा थेरैपी
गोवा सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरैपी को जारी रखेगी। शुक्रवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा कि राज्य में इसके नतीजे मिले हैं। राज्य में इससे कोविड 19 मरीजों में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई। राज्य स्तर की विशेषज्ञ समिति की सलाह पर गोवा सरकार मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरैपी जारी रखेगी।