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सर, सैलरी है 21 हजार, लेकिन ठेकेदार और एडमिन कमीशन काटकर देते हैं 16 हजार

Mon, 23 Sep 2019 09:54 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
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Shastri Bhawan - फोटो : सांकेतिक (फाइल)
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उद्योग भवन में मनीष (बदला हुआ नाम) मिल गए। दो साल से दूसरे तल पर एक विभाग में कार्यालय सहायक के रुप में सेवाएं दे रहे हैं। मनीष दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़कर आए हैं, प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से ठेके की नौकरी मिल गई है। मनीष को हर दिन अपने करियर की चिंता सताती है। एक चिंता और भी है, मनीष का कहना है कि उनके नाम पर सरकार तनख्वाह के मद में 21 हजार रुपये देती है, लेकिन ठेकेदार, एडमिन का कमीशन, ईएसआई आदि काटकर हाथ में 16 हजार रु. के करीब मिलता है। मनीष के इस दावे की पुष्टि उनके साथ ठेके पर काम करने वाली अनीता, रश्मि और कपिल (सभी बदले हुए नाम) ने की।

मिलता है न्यूनतन वेतनमान

युवाओं का कहना है कि उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से तय किया गया न्यूनतम वेतनमान दिया जाता है। बेरोजगारी की भयावह स्थिति के कारण वह मजबूरी में मंत्रालयों में कामकाज करते हैं और दूसरी नौकरी मिलते ही यहां की नौकरी छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे ही एक युवा प्रशांत हैं। वह 2015 में 9,400 रुपये प्रतिमाह पाते थे। उन्होंने पिछले साल गुड़गांव में अच्छी नौकरी मिलने के बाद मंत्रालय में डाटा एंट्री आपरेटर का यह जॉब छोड़ दिया। प्रशांत को पिछले साल मंत्रालय में काम करने की एवज में 15 हजार कुछ सौ रुपये मिल रहे थे।

प्रतिमाह ढाई से तीन हजार तक एजेंसी का कमीशन

शास्त्री भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन में तमाम केंद्रीय मंत्रालयों के दफ्तर हैं। सैकड़ों युवा निजी क्षेत्र की एजेंसियों के माध्यम से सरकार के विभिन्न विभागों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। करीब दर्जनभर युवाओं से बात करने पर जो तथ्य सामने आए चौंकाने वाले हैं। एक अन्य युवा ने बताया कि जय बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज के पास मंत्रालयों को आउटसोर्सिंग पर डाटा एंट्री आपरेटर देने का ठेका है। बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज युवक, युवतियों को मंत्रालय में रखवाने के लिए प्रत्येक से ज्वाइनिंग के समय में 10 हजार रुपये ले लेती थी। जो युवा उस समय पैसे नहीं दे पाते थे, उनके वेतन में से यह राशि अगले तीन महीने में काट ली जाती थी। इसके अलावा हर महीने प्रति व्यक्ति की तनख्वाह से ढाई-तीन हजार रुपये कमीशन भी लिए जाते हैं।

ट्राई पार्टी एग्रीमेंट के तहत मिलती है नौकरी

सूत्र बताते हैं सरकार निजी प्लेसमेंट एजेंसी को आउटसोर्सिंग का जिम्मा सौंपती है। यह एजेंसियां युवाओं से ट्राई पार्टी सहमति पत्र पर दस्तखत कराकर उन्हें नौकरी देती हैं। इन युवाओं की तनख्वाह एजेंसी के खाते से आती है। एजेंसी सरकार से भुगतान लेती है। उद्योग भवन स्थित एक मंत्रालय के निदेशक की मानें तो यहां युवा प्रतिभाओं के साथ ज्यादती हो रही है। सूत्र का कहना है कि निजी प्लेसमेंट एजेंसी से आने वाले इन युवाओं पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। ये युवा सरकारी विभाग के अफसरों की भी सुनते हैं और इन्हें प्लेसमेंट एजेंसियों की दया पर भी रहना पड़ता है। इतना ही नहीं इन युवाओं के साथ सरकार की स्थाई नौकरी कर रहा क्लर्क और रिकार्ड होल्डर भी सौतेला व्यवहार ही करता है।

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