यूपी की जनता से दूर हुई कांग्रेस उनसे जुड़ने के लिए बेताब है। राहुल की किसान यात्रा या खाट सभा का निहितार्थ यही है। पूर्वांचल में शुरू उनकी यात्रा का अभी तक का जो निष्कर्श सामने आया है, वह मात्र इतना की यह कांग्रेस का अपनी जमीन तलाशने की कवायद भर है। लोग जुड़ रहे हैं और उन्हें सुन रहे है।
पहले भी ऐसा होता रहा है लेकिन यूपी के चुनाव में इसका असर पिछले 27 सालों में नहीं दखा गया। इस बार कांग्रेस के चुनाव की कमान पीके ने संभाल रखी है। उनकी टीम के करीब 20 हजार लोग पूर्वांचल में कांग्रेस की जमीन तैयार करने के लिए सक्रिय हैं। एक जिले से कम से कम तीन लाख लोगों से मिलने का लक्ष्य है।
पीके टीम के सदस्य विकास सिंह की मानें तो यह लक्ष्य नहीं, उन परिवारों से मिलना ही है। इसके लिए अलग अलग जिलों में करीब 4500 की टीम सक्रिय है। पीके की जो चुनावी रणनीति है, वह बहुत आसान नहीं है। खासकर कांग्रेस के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए जो एसी में बैठकर कांग्रेस को सत्ता दिलाने की ढकोसलेबाजी किया करते थे। ऐसे नेताओं के दिन लद गए हैं।