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लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए डाटा के स्वायत्त इस्तेमाल का हक : गोयल

Mon, 10 Jun 2019 02:41 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Piyush Goyal - फोटो : PTI
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भारत ने कहा कि देशों के पास अपने लोगों से संबंधित डिजिटल सूचनाओं का उनके कल्याण के लिए इस्तेमाल का अधिकार होना चाहिए। मुक्त व्यापार के नाम पर डाटा के मुक्त प्रवाह की पैरवी नहीं की जा सकती है। जी20 के व्यापार मंत्रियों ने यह भी स्वीकार किया कि डाटा का मुक्त प्रवाह कुछ चुनौतियों को जन्म देता है। 
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जापान के त्सुकूबा में आयोजित व्यापार मंत्रियों की बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमारे देश में डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया और आधार कुछ ऐसी प्रमुख मुहिम हैं जो डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर देश में आर्थिक सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मददगार हुई है। उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल से भारी मात्रा में डाटा सृजित हो रहा है। इसमें निजी, सामुदायिक और सार्वजनिक डाटा शामिल है तथा देशों को अपने लोगों के कल्याण तथा विकास के लिए इसके इस्तेमाल का संप्रभु अधिकार निश्चित तौर पर होना चाहिए। 

साथ ही उन्होंने विकासशील देशों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई रोजगार और आय सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। टिकाऊ तरीके से व्यापार को बढ़ावा देने तथा रोजगार सृजन तेज करने के लिए विकासशील देशों में एमएसएमई को समर्थन देने की जरूरत है। यदि मुक्त व्यापार और निवेश विकास केंद्रित बने रहे तो इनसे विकासशील देशों को फायदा होगा। 
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डब्ल्यूटीओ की सुधार प्रक्रिया में सभी की चिंताओं को किया जाए समायोजित

गोयल ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की सुधार प्रक्रिया में सभी सदस्य देशों की चिंताओं को समायोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि सुधार प्रक्रिया को डब्ल्यूटीओ के मूल सिद्धांतों विशेष और विभेदक उपचार, सर्वसम्मति आधारित फैसला लेने और विकास के लक्ष्य को कमतर नहीं करना चाहिए।

व्यापार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा

जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के प्रमुखों का मानना है कि चीन और अमेरिका समेत कई देशों के बीच छिड़े व्यापार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया है। तीस घंटे की गहन चर्चा के बाद जारी बयान में कहा गया है कि दुनिया भर में अर्थव्यवस्था की वृद्धि नीचे बनी हुई है तथा इसके और नीचे जाने का जोखिम बना हुआ है। नीति निर्माताओं के दिमाग में व्यापार युद्ध है क्योंकि अमेरिका और चीन लगातार एक दूसरे को शुल्क बढ़ोतरी की धमकी दे रहे हैं। 

आईएमएफ की प्रमुख ने चेतावनी दी है कि शुल्क से 2020 में वैश्विक जीडीपी में 0.5 प्रतिशत या करीब 455 अरब डालर की कमी आ सकती है। अंतिम बयान में जी-20 देशों ने 2020 तक अंतिम रिपोर्ट के साथ सहमति के आधार पर समाधान के लिए प्रयास में तेजी लाने पर सहमति जताई। हालांकि बैठक में सुधारों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। 
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