रायबरेली मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के आरोपों पर बुधवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन काल में तो सरकार सरकारी उपक्रमों को निजीकरण के बहाने बेचने के लिए तैयार थी। जबकि वर्तमान सरकार निगमीकरण के माध्यम से ऐसे उद्यमों को बचाने का प्रयास कर रही है।
गोयल ने कहा कि निगमीकरण से किसी मजदूर का नुकसान नहीं होगा बल्कि निवेश और रोजगार बढ़ेगा। गोयल ने कहा कि जिस कोच फैक्टरी के बारे में यहां चिंता जताई गई, वह फैक्टरी स्थापना के छह साल बाद तक सिर्फ कोचों का पेच कसने का काम करती रही।
प्रश्नकाल में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने जब दोबारा इस मामले को उठाया तो रेल मंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में कांग्रेस का दोहरा चरित्र अपनाने का इतिहास रहा है। वर्ष 2004 में तत्कालीन वित्त मंत्री ने रेलवे में निजीकरण की घोषणा की थी। जबकि वर्तमान सरकार निगमीकरण कर ऐसे उपक्रमों को बचाने में जुटी है।
गोयल ने कहा कि रायबरेली कोच फैक्टरी का निर्माण 2008 में हुआ। वर्ष 2014 तक इस फैक्टरी में एक भी कोच नहीं बना बस कपूरथला से आए कोचों के पेच कसे गए। जबकि नई सरकार आने के बाद पिछले वर्ष ही इस फैक्टरी ने 1422 कोच बनाए। गौरतलब है कि मंगलवार को सोनिया ने सरकार पर रायबरेली समेत छह सरकारी उपक्रमों को निगमीकरण के बहाने निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि निगमीकरण निजीकरण की ओर बढ़ाया गया कदम है। इससे ऐसे उपक्रमों में काम करने वाले कर्मियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।