केरल में पुलिस संघों की नई संरचना को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार ने पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना बदलाव लागू कर पुलिसकर्मियों के संगठनात्मक अधिकारों को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई व्यवस्थाओं की जगह नई संरचना थोपने से पुलिस बल की एकता और मनोबल पर असर पड़ सकता है।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बुधवार को कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। विजयन ने पुलिस संघों के एकतरफा पुनर्गठन के जरिए राज्य पुलिस को राजनीतिक नियंत्रण में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
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एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने संबंधित पक्षों से बिना किसी चर्चा के पुलिस संघों का पुनर्गठन किया है, जो "बेहद अलोकतांत्रिक" है और पुलिसकर्मियों की संगठनात्मक स्वतंत्रता पर हमला है। विजयन ने दावा किया कि राज्य में वर्ष 1979 से पुलिस संघ काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संबंधित पक्षों से सलाह किए बिना मौजूदा व्यवस्था को "तानाशाही तरीके" से खत्म कर दिया।
क्या केरल पुलिस का मनोबल होगा कमजोर?
विजयन ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई समितियों की जगह तदर्थ समितियां बनाए जाने की खबरों की आलोचना करते हुए कहा कि यह पुलिस संघों की स्वायत्तता में अस्वीकार्य हस्तक्षेप है। माकपा नेता ने आरोप लगाया कि पुनर्गठन के तहत ग्रेड पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों का दर्जा घटाया गया है और एक ही रैंक के कर्मचारियों को अलग-अलग संघों में बांटा गया है। उनके अनुसार, इससे पुलिस बल की एकजुटता और मनोबल कमजोर होगा।
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विजयन ने लगाए क्या आरोप?
विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस का राजनीतिकरण कर उसे अपने हितों के अधीन काम करने वाला बल बनाना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद इस संबंध में जारी कथित आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। विजयन की यह टिप्पणी उन मीडिया रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि यूडीएफ सरकार ने मान्यता प्राप्त पुलिस संघों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी है। इसके चलते केरल पुलिस ऑफिसर्स एसोसिएशन को भंग किए जाने की भी खबर है।