देश के पायलट संगठनों ने विमानन सुरक्षा नियामक डीजीसीए से नई उड़ान ड्यूटी और विश्राम अवधि से जुड़े नियमों के क्रियान्वयन में एयरलाइंस को किसी भी तरह की राहत या विस्तार देने से रोकने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होगी।
एफआईपी ने मंगलवार को डीजीसीए को पत्र लिखकर कहा कि वह किसी भी प्रकार के आदेश, संचार या निर्देश को तुरंत वापस ले, जिसके तहत एयरलाइंस को नए नियम लागू करने में छूट या विस्तार दिया गया है। संगठन का दावा है कि वह देश के 5,000 से अधिक पायलटों का प्रतिनिधित्व करता है और उसका उद्देश्य सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं होने देना है।
नए नियमों का प्रावधान
डीजीसीए द्वारा जारी नई ड्यूटी और रेस्ट पीरियड से जुड़े नियम दो चरणों में लागू किए जा रहे हैं। पहला चरण जुलाई 2025 से लागू हो चुका है, जिसमें पायलटों के साप्ताहिक विश्राम को 48 घंटे तक बढ़ाया गया है। साथ ही रात के घंटे बढ़ाने और एक सप्ताह में अधिकतम दो नाइट लैंडिंग की सीमा तय की गई है, जो पहले छह थी। दूसरा चरण अगले महीने से लागू होना है, जिसमें इन दिशानिर्देशों को और सख्त किया जाएगा।
एयरलाइंस का विरोध और अदालत का आदेश
इन नए नियमों का एयरलाइंस जैसे इंडिगो और एयर इंडिया ने पहले विरोध किया था। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी एयरलाइंस को इन्हें मानना पड़ा। अदालत ने डीजीसीए को आदेश दिया था कि वह इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करे। एफआईपी ने कहा है कि अगर नियामक ने छूट दी तो यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना होगी।
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पायलटों की सुरक्षा चिंता और हालिया विवाद
हाल ही में डीजीसीए द्वारा दो-पायलट संचालन वाले बोइंग 787 विमानों की फ्लाइट ड्यूटी सीमा एक घंटे बढ़ाने के निर्णय पर भी पायलट समुदाय ने नाराजगी जताई है। पायलटों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, क्योंकि इससे थकान से जुड़ी घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
हाल ही में एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे में पायलट की थकान और तकनीकी गड़बड़ी को प्रमुख कारणों में गिना गया था। एफआईपी ने कहा कि अगर नियामक ने अपने कदम वापस नहीं लिए तो वह अदालत में अवमानना याचिका दायर करेगी।
डीजीसीए ने 10 नए एरोमेडिकल इवैल्यूएशन सेंटरों को दी मंजूरी
डीजीसीए ने मंगलवार को 10 नए एरोमेडिकल इवैल्यूएशन सेंटरों को भी मंजूरी दे दी है। इस कदम से देशभर में पायलटों और अन्य लाइसेंसधारकों के लिए मेडिकल जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। डीजीसीए ने कहा कि इससे क्लास एक, दो और तीन मेडिकल परीक्षाओं की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे पायलटों को समय पर जांच सुविधाएं मिल सकेंगी।
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पायलटों की मेडिकल जांच प्रक्रिया में आएगी तेजी
डीजीसीए ने इस महीने की शुरुआत में निजी एरोमेडिकल इवैल्यूएशन सेंटरों को भी नागरिक विमानन चिकित्सा परीक्षण करने की अनुमति देने का निर्णय लिया था। पहले आठ केंद्र केवल क्लास एक प्रारंभिक मेडिकल परीक्षा के लिए अधिकृत थे, लेकिन अब नए केंद्रों को सभी प्रकार की जांच जैसे विशेष, अस्थायी रूप से अयोग्य घोषित पायलटों की पुनः जांच और आयु-विशिष्ट मेडिकल जांच की जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी केंद्र देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि सभी क्षेत्रों के पायलटों को त्वरित सुविधा मिल सके।