पायलट परियोजना के तहत आवारा मवेशियों के लिए 0.21 से 2.29 हेक्टेयर तक के आश्रय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर उनकी उपस्थिति कम हो जाएगी। शुरुआत में यह पहल उत्तर प्रदेश- हरियाणा सीमा से लेकर एनएच-334बी के रोहना खंड समेत विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों पर लागू की जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने आवारा मवेशियों से संबंधी दुर्घटनाओं से बचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर पशु आश्रय उपलब्ध कराने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की। पायलट परियोजना के तहत आवारा मवेशियों के लिए 0.21 से 2.29 हेक्टेयर तक के आश्रय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर उनकी उपस्थिति कम हो जाएगी। शुरुआत में यह पहल उत्तर प्रदेश- हरियाणा सीमा से लेकर एनएच-334बी के रोहना खंड समेत विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों पर लागू की जाएगी।
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इसके तहत खरखौदा बाईपास के साथ आश्रय स्थल स्थापित किए जाएंगे। इसी प्रकार, हांसी बाईपास पर एनएच-148बी के भिवानी-हांसी खंड, एनएच-21 के कीरतपुर-नेर चौक खंड और एनएच-112 पर जोधपुर रिंग रोड के डांगियावास से जाजीवाल खंड पर आश्रयों का निर्माण किया जाएगा। इस पहल को लागू करने के लिए एनएचएआई ने मेसर्स गावर कंस्ट्रक्शन लि. के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। ब्यूरो
अनुबंध के तहत, गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड एनएचएआई की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीन पर पशु आश्रयों का निर्माण करेगी। समझौते के अनुसार, कंपनी जानवरों के कल्याण के लिए प्राथमिक चिकित्सा, पर्याप्त चारा, पानी और केयरटेकर की व्यवस्था करेगी व आश्रयों का रखरखाव करेगी।
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इस पहल को सीएसआर के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। घायल आवारा जानवरों के परिवहन और इलाज के लिए मवेशी एम्बुलेंस तैनात की जाएंगी। जानवरों की समय पर चिकित्सा देखभाल के लिए प्रत्येक तरफ से 50 किमी की दूरी पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और अस्पताल स्थापित किया जाएगा।