नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिए दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में कहा गया है कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अनुचित और अश्लील सामग्री परोसी जा रही है, लिहाजा इन प्लेटफार्म निगरानी करने के लिए एक स्वायत्त संस्था या बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यिन की पीठ ने केंद्र, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंटरनेट तथा मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। यह याचिका वकील शशांक शेखर झा और अपूर्व अरहटिया ने दायर की है।
याचिका में विभिन्न ओटीटी-स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स की सामग्री की निगरानी और प्रबंधन के लिए सुव्यवस्थित बोर्ड या एसोसिएशन की जरूरत पर जोर दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से अभी देश में सिनेमाघरों के पूरी तरह जल्द खुलने की उम्मीद नहीं है और ओटीटी-स्ट्रीमिंग और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को किसी प्रकार की मंजूरी के बिना ही इसे प्रदर्शित करने का जरिया दे दिया है।
याचिका में दावा किया गया है कि 40 से अधिक ओटीटी और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म हैं जो सीधे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रहे हैं। इन प्लेटफार्म पर धूम्रपान, अत्यधिक हिंसा, यौन दृश्य, अश्लील भाषा खुलेआम देखने को मिल रहे हैं, जो सामान्य रूप से चेतावनी के साथ प्रदर्शित किए जाते हैं। इन प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून नहीं होने की वजह से हर दिन इसी आधार पर कोई न कोई मामला दायर हो रहा है।
कानून में इस तरह की खामियों की वजह से सरकार को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारियों ने इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ खास नहीं किया है।
नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, जी5 और हॉटस्टार समेत किसी भी ओटीटी-स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म्स ने इस साल फरवरी में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी स्व: नियमन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। एक अन्य मामले में हाल ही में मंत्रालय ने कहा था कि डिजिटल मीडिया को नियमित या नियंत्रित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।