ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2015 में सर्वेक्षण किया था। इसमें पाया गया कि यदि 2.95 करोड़ घरों की जरूरत है। इसमें यह भी पता चला कि यदि इतने घर बनाकर दे दिये जाएंगे तो सबको पक्का घर मिल जाएगा। यानि गांवों में रहने वाले सबके सिर पर छत हो जाएगी। इसके लिए मंत्रालय ने दो चरणों में योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इसके पहले चरण का लगभग 68 फीसदी काम पूरा हो गया है। नक्शे और घर बनाने के दिन 314 से घटाकर 114 हो गए हैं। ऐसे में मंत्रालय केवरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लक्ष्य को पा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक 5846855 घर बनकर तैयार हो गये हैं। अभी चार महीने का वक्त डेड लाइन के लिये बाकी है।
ऐसे में बचे हुए लगभग चालीस लाख घर बनकर तैयार हो जाएंगे। जिन राज्यों ने तमाम कवायद के बाद भी सुनवाई नहीं की है। इसमें तेलंगाना सबसे ऊपर है, जहां सरकार को मंत्रालय से अल्टीमेटम चला गया है। मुख्य सचिव को इस बाबत पत्र भेजकर बताया गया है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय योजना के पैसे को वापस ले लेगा। अधिकारी के मुताबिक तेलंगाना सरकार स्कीम के मानकों का पालन करने को तैयार नहीं थी इसलिए मंत्रालय को स्कीम को विदड्रा करने का फैसला लेना पड़ा।