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PFI: सीरिया के जिहादियों को हथियार देने वाले कट्टरपंथी तुर्की संगठन के साथ पीएफआई का संबंध, हुआ बड़ा खुलासा

Thu, 29 Sep 2022 06:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आतंकवाद के लिए अपनी जीरो टोलेरेंस नीति पर काम करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने UAPA के तहत पांच साल की अवधि के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है।
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पीएफआई पर प्रतिबंध - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा पीएफआई से जुड़े आठ अन्य संगठनों पर भी गृह मंत्रालय ने पाबंदी लगा दी है। इस बीच, अधिकारियों ने एक और बड़ा खुलासा किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सीरिया में अल-कायदा से जुड़े जिहादियों को हथियार मुहैया कराने वाले कट्टरपंथी तुर्की समूह और आईएचएच के दो टॉप नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।  

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उन्होंने बताया कि फाउंडेशन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड फ्रीडम एंड ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ, जिसे आईएचएच के नाम से जाना जाता है, खुद को तुर्की मानवाधिकार संगठन बताता है। इस संगठन का दावा है कि वह समाज सेवा के रचनात्मक कार्यों में शामिल रहता है। हालांकि जांच में इसकी हकीकत अलग ही पाई गई है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि यह अल-कायदा से जुड़ा तुर्की चैरिटी संगठन है। इतना ही नहीं इस पर जनवरी 2014 में सीरिया में अल-कायदा से जुड़े जिहादियों को हथियारों सप्लाई करने का आरोप भी लगा था। 

तुर्की के पूर्व वित्त मंत्री और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन के दामाद बेरात अल्बायरक के लीक ईमेल से भी इसके हकीकत सामने आई थी। लीक हुए ईमेल में सामने आया था कि लीबियाई समूहों को हथियार देने में IHH का हाथ था। वहीं, सामने आया है कि IHH तुर्की की ख़ुफ़िया सेवा MIT के साथ मिलकर काम करता है।
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नॉर्डिक मॉनिटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएफआई की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य ईएम अब्दुल रहिमन और प्रोफेसर पी कोया ने आईएचएच के साथ इस्तांबुल में एक बैठक की थी। चरमपंथी संगठन पीएफआई के साथ तुर्की की खुफिया सेवा से जुड़े जिहादी चैरिटी समूह की बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि एर्दोआन मुस्लिम समुदाय के वैश्विक नेता के रूप में दक्षिण पूर्व एशिया के मुसलमानों के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पीएफआई और तुर्की के बीच संबंध का पता इस बात से भी चलता है कि पीएफआई ने 2016 के तख्तापलट के प्रयास के बाद एर्दोआन का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया था। उन्होंने कहा कि पीएफआई और आईएचएच दोनों दोनों संगठन जिहादी विचारधारा की वकालत करते हैं। 


इससे पहले, आतंकवाद के लिए अपनी जीरो टोलेरेंस नीति पर काम करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने UAPA के तहत पांच साल की अवधि के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है।
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