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निजामाबाद मामला: 'PFI ने हथियारों की ट्रेनिंग के लिए आयोजित किया शिविर, पांच आरोपी नामजद', आरोप पत्र में NIA

Fri, 17 Mar 2023 03:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरोप पत्र में आरोपियों रहीम उर्फ अब्दुल रहीम, शेख वहैद अलगी उर्फ अब्दुल वाहिद अली,  जफरुल्ला खान पठान, शेख रियाज अहमद और अब्दुल वारिस को नामजद किया है।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने निजामाबाद मामले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पांच सदस्यों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। हैदराबाद की एक विशेष एनआईए अदालत में दाखिल पूरक आरोप पत्र में कहा गया है कि पीएफआई के नेताओं और कैडरों ने आंतक व हिंसा के कृत्यों के लिए प्रशिक्षित करने के लिए प्रभावशाली मुस्लिम युवकों को भर्ती किया। उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने के लिए शिविर आयोजित किया। 

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एजेंसी ने आरोप पत्र में इन आरोपियों को किया नामजद
आरोपपत्र में आरोपियों रहीम उर्फ अब्दुल रहीम, शेख वहैद अलगी उर्फ अब्दुल वाहिद अली,  जफरुल्ला खान पठान, शेख रियाज अहमद और अब्दुल वारिस को नामजद किया है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी, 153 ए और यूएपीए, 1963 की धारा 13 (1) (बी), 18, 18 ए और 18 बी के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है। 

पहले 11 आरोपियों के खिलाफ दायर किया था आरोप पत्र
इससे पहले दिसंबर 2022 में एनआईए ने मामले को तेलंगाना पुलिस से अपने हाथों में लिया था और 11 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया था। एजेंसी ने कहा कि उसने पीएफआई के नेताओं व कैडरों द्वारा युवाओं को  भर्ती करने, उन्हें कट्टरपंथी बनाने, आंतक व हिंसा के लिए उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने के लिए शिविर आयोजित करने की आपराधिक साजिश से संबंधित मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। 
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यह भी पढ़ें: PFI केस- हिंदूवादी संगठनों की जासूसी करने वाली सोनू मंसूरी की जमानत याचिका खारिज
   
आरोप पत्र: हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने था उद्देश्य
एनआईए ने कहा कि जिन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है, वे पीएफआई के प्रशिक्षित कार्यकर्ता हैं जो प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने, उन्हें पीएफआई में भर्ती करने और विशेष रूप से आयोजित पीएफआई प्रशिक्षण शिविरों में हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल पाए गए थे। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने कहा कि इनका उद्देश्य 2047 तक देश में इस्लामी शासन स्थापित करने की साजिश को आगे बढ़ाने के लिए हिंसक आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना था।

'हथियारों के प्रशिक्षण शिविरों में भेजे गए मुस्लिम युवा'
एनआईए ने कहा, इन पीएफआई कैडरों ने धार्मिक ग्रंथों की गलत व्याख्या की और ऐलान किया कि भारत में मुसलमानों की पीड़ा को कम करने के लिए जिहाद का हिंसक रूप आवश्यक है। एक बार पीएफआई में भर्ती होने के बाद मुस्लिम युवाओं को आरोपी पीएफआई कैडरों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में भेजा गया, जहां उन्हें गले, पेट और सिर जैसे उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर हमला करके अपने 'लक्ष्यों' को मारने के लिए घातक हथियारों के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया।
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पिछले साल गृहमंत्रालय ने लगाया था पीएफआई पर प्रतिबंध
विभिन्न राज्य पुलिस इकाइयों और राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा की गई जांच के दौरान हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता सामने आने के बाद पीएफआई और उसके कई सहयोगियों को पिछले साल सितंबर में गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया था।

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