पेट्रोल की कीमतों में लगी आग अब भाजपा के अपने घर में पहुंच गई है। पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर ने पेट्रोल की कीमतों को लेकर सूबे की अपनी ही सरकार को पत्र लिखकर विपक्ष को मुद्दा थमा दिया है।
गौर का कहना है कि महाराष्ट्र, यूपी और राजस्थान के मुकाबले मध्य प्रदेश में पेट्रोल काफी महंगा है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार के अतिरिक्त कर वसुली की वजह से यह नौबत आई है। गौर ने मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया को लिखे खत में सूबे में अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा वसुली जा रही वैट की राशि को कम करने की मांग की है।
क्या है गौर का पेट्रोल बम, जयंत मलैया को लिखे खत के अहम बिंदू
गौर ने मलैया को कहा है कि जीएसटी की व्यवस्था लागू होने के बावजूद भी पेट्रोल और डीजल को इससे अलग रखा गया है। दोनों पेट्रोलियम पदार्थों पेट्रोल और डीजल पर पूर्व की तरह वैट टैक्स ही लागू किया गया है।
जीएसटी की दरें तो एक समान हैं मगर वैट की दरों को तय करने का जिम्मा राज्यों के पास है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर 31 प्रतिशत और डीजल पर 27 प्रतिशत वैट है। इसके अलावा डीजल पर 1.5 रुपये और पेट्रोल पर 4 रुपये का अतिरिक्त कर भी है।
जबकि मध्यप्रदेश की सीमा से सटे अन्य राज्यों उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल पर वैट दरें मध्यप्रदेश से कम हैं। जिसकी वजह से इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हैं। और सीमावर्ती जिले के लोग इन राज्यों से ही पेट्रोल और डीजल खरीदते हैं।
इसकी वजह से कई राज्यों की सीमाओं पर बसे मध्य प्रदेश के जिलों में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में 60 प्रतिशत की कमी देखी गई है। गौर ने मामले की सच्चाई का पता लगाते हुए प्रदेश सरकार से पेट्रो पदार्थ पर वैट दरें घटाने की मांग की है।