भाजपा का क्या दावा है?
भाजपा ने दावा किया है कि कांग्रेस शासित राज्यों में भाजपा शासित राज्यों से महंगा पेट्रोल-डीजल है। पार्टी का कहना है कि भारत के हर राज्य में एक समान केंद्रीय उत्पाद शुल्क है। इसके बावजूद भाजपा शासित दिल्ली में 102 और गुजरात में 101 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल है। वहीं, कांग्रेस शासित तेलंगाना में 118, कर्नाटक में 110 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ शासित केरल में 114 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल है। भाजपा का कहना है कि, जो पार्टी केंद्र सरकार को ईंधन की कीमतों पर उपदेश देती है। वही अपने ही लोगों पर प्रति लीटर 16 रुपये अधिक कर लगाती है। राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पाखंडी है।
टॉप पांच में तीन राज्यों में भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार
पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगा पेट्रोल आंध्र प्रदेश में मिल रहा है है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पेट्रोल की कीमत 118. 34 रुपये लीटर हो गई है। आंध्र प्रदेश में एनडीए की सरकार है। सबसे महंगे पेट्रोल के मामले में दूसरे नंबर पर तेलंगाना है। तेलंगाना में सबसे महंगा पेट्रोल निजामाबाद जिले में है। यहां सोमवार से इसकी कीमत 117.06 रुपये प्रति लीटर हो गई है। तेलंगाना में कांग्रेस के रेवंत रेड्डी की सरकार है। तीसरे नंबर में मध्य प्रदेश है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सोमवार को पेट्रोल का रेट 116.09 रुपये लीटर पहुंच गया है। यहां भी भाजपा की सरकार है। चौथे नंबर में केरल है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सोमवार को पेट्रोल का रेट 115.34 रुपये लीटर पहुंच गया। इसके साथ ही पांचवे नंबर बिहार है। बिहार के अररिया जिले में सोमवार को पेट्रोल की कीमत 115.07 रुपये लीटर हो गई।
क्या कहीं 100 रुपये के नीचे भी हैं पेट्रोल की कीमतें?
अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादर और नगर हवेली और दमन द्वीप में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से भी कम है।
बता दें कि 10 दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले 23 मई को कीमतों में बढ़ोतरी करते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतें 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई थीं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के बीच पिछले 10 दिन में ईंधन की दरों में यह चौथी बढ़ोतरी है। 15 मई को ही सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ी हुई कीमतों का बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू किया था।