सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को 62 घर खरीदारों ने याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) अधिनियम 2016 के तहत बिल्डर और एजेंट खरीदारों के लिए एक आदर्श समझौते की रूपरेखा तय करने का निर्देश देने की मांग की। याचिका में कहा गया कि इससे रियल्टी क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों के हित सुरक्षित रहेंगे।
घर खरीदारों के समूह ने याचिका में राज्यों को मॉडल बिल्डर बायकर एग्रीमेेंट और मॉडल एजेंट बायर एग्रीमेेंट को लागू व इसका पालन सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की है। इसमें दलील दी गई कि इससे खरीदारों के लिए आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक संकट कम होगा। याचिका में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, डीएलएफ सदर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड (बेगुर ओएमआर होम्स प्राइवेट लिमिटेड) और एनाबेल बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को पार्टी बनाया गया है।
वकील अश्विनी कुमार दुबे द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया कि प्रवर्तक, बिल्डर और एजेंट मनमाने ढंग से एकतरफा समझौतों का इस्तेमाल करते हैं और ग्राहकों को अपने साथ एक समान मंच पर नहीं रखते। यह संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 21 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं ने कहा, कब्जा देने और ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे में जानबूझकर देरी के कई मामले सामने आए हैं लेकिन पुलिस ने इन सभी मामलों में समझौते की मनमानी धाराओं का हवाला देते हुए एफआईआर तक दर्ज करने से इनकार कर दिया। बिल्डर बार बार कब्जा देने की नई नई तारीख जारी करते हैं और मनमाने ढंग से अनुचित तौर तरीके अपनाते हैं। यह सब आपराधिक साजिश, फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और भरोसा तोड़ने में आता है। याचिका में कोर्ट से घर खरीदारों की इन मुश्किलों पर संज्ञान लेते हुए केंद्र व राज्यों को उचित कार्रवाई करने और नियम बनाने का निर्देश देने की मांग की गई।