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दिल्ली दंगे के आरोपी फैजान की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज

Tue, 24 Nov 2020 03:32 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में आरोपी फैजान खान की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फैजान की जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज कर दी है।

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फैजान पर आरोप है कि उसने सीएए के विरोध में जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के छात्रों को बिना पहचान पत्र के सिम उपलब्ध करवाया था जिसके जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था।

बता दें कि हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी फैजान खान को बीते 24 अक्तूबर को जमानत दे दी थी। पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत नहीं होने की स्थिति में पीठ ने जमानत दी थी। पीठ ने कहा पुलिस का आरोप है कि फैजान ने सीएए के विरोध में जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के छात्रों को सिम उपलब्ध करवाई थी, जिसके जरिए व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया था। वह उस व्हाट्स एप ग्रुप का हिस्सा भी नहीं था। 
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न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की एकल पीठ ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि पुलिस ने जो आरोप लगाए हैं, उनके तहत कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। पुलिस ने उसके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन उसके खिलाफ न ही कोई सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और न ही गवाह है।

पीठ ने कहा कि पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ ऐसा भी कोई आरोप नहीं है कि वह किसी भी तरह से टेरर फंडिंग से जुड़ा है और न ही यह आरोप लगाया कि सीएए के विरोध प्रदर्शन में उसका हाथ था। पुलिस ने आरोप लगाया कि उसने फर्जी आईडी पर सिम दी। यह आरोप नहीं है उसने किस मकसद के लिए सिम दी या उसे पता था कि सिम का प्रयोग किस मकसद के लिए किया जाएगा।

पीठ ने पुलिस से पूछा कि क्या इस मामले में उसके पास आरोपी के खिलाफ व्हाट्स एप चेट, मैसेज या अन्य कोई साक्ष्य है? इस पर पुलिस की ओर से कोई जवाब न मिलने पर पीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। इसलिए आरोपी को न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। 

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