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तीन जातियों के ही लोग राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड क्यों? दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Wed, 26 Dec 2018 11:03 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को जातिगत भेदभाव के आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय, थल सेनाध्यक्ष, राष्ट्रपति सुरक्षा कमांडेंट, सेना के भर्ती निदेशक को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

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याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों में केवल तीन जातियों के नौजवानों को ही भर्ती किया जाता है। यह अन्य जातियों के समानता व रोजगार के समान अवसर के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। इसलिए इस परंपरा को बदलकर नए नियम तय किए जाएं।

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व न्यायमूर्ति संजीव नरुला की खंडपीठ ने इनके जवाब पर याची को अपना तर्क अगली तारीख 8 मई से पहले पेश करने का निर्देश दिया है। पेश याचिका हरियाणा निवासी गौरव यादव ने दायर कर राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती के लिए चार सितंबर 2017 की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है।
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इस याचिका में कहा गया है कि इसके लिये केवल तीन जातियों जाट, सिख जाट व राजपूतों नौजवानों से ही आवेदन मांगे गए थे। वह इस भर्ती की सभी शर्तें पूरी करता है, लेकिन उसे केवल इसलिए भर्ती नहीं किया गया, क्योंकि वह उन तीन जातियों से नहीं है।

अधिवक्ता राम नरेश यादव के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि सरकारी कार्यालय में केवल तीन जातियों को भर्ती के लिए आमंत्रित करना अन्य जातियों के साथ भेदभाव है। यह संविधान में दिए गए समानता, रोजगार के मूल अधिकार का भी उल्लंघन है। यह भर्ती प्रक्रिया अन्य योग्य उम्मीदवारों को रोजगार के अधिकार से वंचित करती है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका सुनने से इंकार कर दिया था।

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