वृंदावन में सुंदरीकरण के खिलाफ पर्यावरणविदों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाया है। एनजीटी में इस मामले में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि केशी घाट से यमुना नदी के निचले स्तर तक करीब तीन किमी. क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुंदरीकरण और निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
परियोजना के तहत केशी घाट की लंबाई करीब 750 मीटर डूब क्षेत्र में बढ़ाई जानी है। ऐसा करना पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है। एनजीटी इस मामले पर जल्द ही विचार कर सकता है। गौरतलब है कि ये परियोजना मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है।
सरकार की सुंदरीकरण परियोजना के मुताबिक केशी घाट के क्षेत्र को बढ़ाने के साथ सहायक नदियों की सफाई और ओवरफ्लो होकर नदी में जाने वाले सीवर के लिए नाला निर्माण और पाइपलाइन भी प्रस्तावित है। आकाश वशिष्ठ की ओर से एनजीटी में दाखिल याचिका में कहा गया है कि संवेदनशील यमुना डूब क्षेत्र का सुंदरीकरण जल (संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण ) कानून, 1974 और पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिसूचना, 2006 का उल्लंघन है। इस परियोजना के लिए निर्माण से पहले पर्यावरणीय संबंधी मंजूरी भी नहीं ली गई है।