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'पद्मावती' विवाद: सुनवाई को तैयार SC, विवादित सीन हटाने को दायर हुई थी याचिका

Fri, 17 Nov 2017 03:20 PM IST
टीम डिजिटल अमर उजाला
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पद्मावती
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फिल्म पद्मावती को लेकर उठा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां एक वकील ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की मांग है कि फिल्म से उन आपत्तिजनक सीन्स को हटाया जाए जो बवाल की वजह बने हुए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट भी याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है।
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  A lawyer filed a petition in Supreme Court against #Padmavati, seeking deletion of objectionable scenes. Court said "will consider the plea" pic.twitter.com/pPV8cFTeew — ANI (@ANI) November 17, 2017
पद्मावती मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई है, जहां अगली सुनवाई की तारीख 20 दिसंबर रखी गई है। याचिका में मांग की गई है कि फिल्मी की रिलीज पर रोक लगाई जाए, क्योंकि फिल्म से रानी पद्मावती की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही याचिका में सेंसर बोर्ड को कमेटी बनाकर आपत्तिजनक सीन हटाने का आग्रह किया है। 
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पढ़ें: 'पद्मावती विवाद': रिलीज पर रोक के लिए HC में दायर हुई याचिका, 20 दिसंबर को होगी सुनवाई

याचिका में ये भी कहा गया है कि जब दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिजली की गलत नजर रानी पद्मिनी पर पड़ी थी तो उन्होंने 16000 अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था। उनका चरित्र महान था और वह आज भी हमारी आन-बान-शान हैं। फिल्म में इतिहास की मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है।

 
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राजनीतिक तूल पकड़ रहा है पद्मावती विवाद

दीपिका पादुकोण, पद्मावती - फोटो : Twitter
फिल्म का विवाद राजनीतिक तूल पकड़ता दिख रहा है, क्योंकि हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि आज जो ये तथाकथित जांबाज महाराजा एक फिल्मकार के पीछे पड़े हैं और दावा कर रहे हैं कि उनका सम्मान दांव पर है, यही महाराजा उस समय भाग खड़े हुए थे, जब अंग्रेजों ने उनके मान को रौंद दिया था।

उनकी इस बात पर केंद्रीय स्मृति ईरानी ने विरोध करते हुए कांग्रेस के बड़े नेता दिग्विजय सिंह, अमरिंदर सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया से जवाब मांगा है। उन्होंने लिखा,' क्या सभी महाराजाओं ने ब्रिटिश के सामने घुटने टेके थे?? शशि थरूर की इस टिप्पणी पर क्या कहेंगे ज्योतिरादित्य, दिग्गी राजा और अमरिंदर सिंह?'

हालांकि, बयान पर विवाद बढ़ने के बाद शशि थरूर ने सफाई में ट्वीट भी किए हैं। उन्होंने लिखा कि कुछ भाजपाई अंधभक्तों द्वारा साजिशन झूठा प्रचार किया जा रहा है कि मैंने राजपूत समाज के सम्मान के खिलाफ टिप्पणी की है।   1/2 कुछ भाजपाई अंधभक्तों द्वारा साज़िशन झूठा प्रचार किया जा रहा है कि मैंने राजपूत समाज के सम्मान के ख़िलाफ़ टिप्पणी की हैI मैंने राष्ट्र हित में अंग्रेज़ हकूमत के कार्यकाल का विरोध करते हुए ऊन राजाओं की चर्चा की थी जो स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज़ के साथ थे। — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) November 16, 2017   2/2 मैं यह भी निर्भीक होकर कहूँगा की भारत की विविधता व समरस्ता के मध्यनज़र राजपूत समाज की भावनाओ का आदर किया जाना सबका कर्तव्य है। राजपूतों की बहादुरी हमारे इतिहास का हिस्सा है व ईस पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता। भाजपा व उसके सेन्सर बोर्ड को ईन भावनाओ का सम्मान करना चाहिए। — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) November 16, 2017
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