सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अवैध रूप में देश में घुस आए तमाम लोगों की पहचान करने और उन सभी को वापस उनके देश भेजने की गुहार लगाई गई है। याचिका में कहा गया कि रोहिंग्या मुसलमान और बांग्लादेशी समेत जितने भी घुसपैठिए देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं, उन्हें हिरासत में लिया जाए।
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शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर ने 3 अक्टूबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमान और बांग्लादेशी समेत सभी घुसपैठिए और शरणार्थियों की पहचान की जाए और उन्हें हिरासत में लेकर एक साल के भीतर उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाए।
साथ ही घुसपैठियों और शरणार्थियों के लिए कानून में बदलाव किया जाए। इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाया जाए। याचिका में कहा गया कि इनमें से अधिकतर लोगों ने आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदान पहचान पत्र आदि बनवा लिए हैं।
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लिहाजा इन लोगों को सरकारी दस्तावेज बनवाने में मदद करने वाले एजेंट या सरकारी अधिकारियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। याचिका में कहा गया है कि देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण की जिम्मेदारी केंद्र व राज्य सरकारों की है।