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West Bengal: चुनाव के बाद बंगाल में हिंसा का डर, सुरक्षा की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर

Thu, 06 Jun 2024 07:57 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

याचिका में मांग की गई है कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वे विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिंसा से बचाने के लिए सुरक्षा दें। हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता को याचिका दायर करने की अनुमति दी और याचिका पर बाद में सुनवाई करने की बात कही। 
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कलकत्ता हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर बंगाल में हिंसा का डर बढ़ गया है। यही वजह है कि कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वे विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिंसा से बचाने के लिए सुरक्षा दें। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव बाद की हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा, अगर राज्य सरकार हिंसा पर काबू नहीं कर पाती है तो अगले पांच वर्षों तक के लिए प्रदेश में केंद्रीय बल को तैनात करने का निर्देश देना पड़ सकता है। चुनाव के बाद हुई हिंसा में 11 लोगों की मौत का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में शिकायत की गई थी कि हिंसा से जनहानि हो रही है। पुलिस शिकायतें नहीं ले रही है।

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याचिकाकर्ता का दावा नतीजों के बाद बंगाल में हो रही हिंसा
याचिकाकर्ता ने जस्टिस कौशिक चंदा और जस्टिस अपूर्व सिन्हा रॉय की खंडपीठ के समक्ष आरोप लगाया कि सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव के बाद राज्य के कुछ स्थानों पर चुनाव बाद हिंसा हो रही है। इस पर जस्टिस कौशिक चंद और जस्टिस अपूर्ब सिन्हा राय की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि बंगाल में ही क्यों चुनाव बाद भी आयोग को केंद्रीय बल को तैनात करने का निर्देश देना पड़ता है। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसकी हाईकोर्ट ने सीबीआई से जांच का निर्देश दिया था। 

हाईकोर्ट ने भी बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के आरोपों पर चिंता जाहिर की। हाईकोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किया कि हिंसा प्रभावित लोग राज्य के डीजीपी को ईमेल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कराएं। अगर डीजीपी को लगता है कि अपराध हुआ है तो वह शिकायत को संबंधित पुलिस थाने को भेज सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं रुकें। हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद यह दिशा निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों में उन्हें मिलने वाली शिकायतों और उनके आधार पर दर्ज एफआईआर और क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी देने का आदेश दिया है। 
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डीजी खुद जांच की निगरानी करेंगे
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि चुनाव के बाद हिंसा के संबंध में किसी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो इसे राज्य पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। डीजी खुद जांच की निगरानी करेंगे। मामले की अगली सुनवाई में डीजी को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा देकर कोर्ट को बताना होगा कि चुनाव बाद हिंसा को लेकर अब तक कितनी शिकायतें मिली हैं और कितने मामलों में एफआइआर दर्ज की गई है।
 



बंगाल भाजपा ने भी टीएमसी पर लगाए हिंसा के आरोप
बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने उत्तर 24 परगना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं और उनके घरों में लूटपाट की गई। टीएमसी का झंडा लिए लोगों ने मुझ पर भी हमला किया।' सुकांत मजूमदार चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने गए थे। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में टीएमसी ने जोरदार जीत हासिल की है और पार्टी ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 29 पर जीत दर्ज की है। वहीं पिछले आम चुनाव में 18 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा 12 पर सिमट गई है। कांग्रेस को बंगाल में एक सीट मिली है। 

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