सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को अवमानना का दोषी ठहराते हुए और उसे हिरासत में लेने का आदेश देते हुए कहा कि अदालत आने वाले व्यक्ति को साफ नीयत के साथ आना चाहिए। कभी भी किसी फर्जी दस्तावेज दाखिल करके न्याय की धारा को प्रदूषित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस व्यक्ति ने शुरुआती चरण में ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और बिना शर्त माफी मांग ली है।
शीर्ष अदालत ने जिक्र किया कि जिस व्यक्ति को पिछले साल महाराष्ट्र में एक मामले के संबंध में अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था, उसने आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह और मांगा था। आवेदन के साथ उन्होंने दो डॉक्टरों के हस्ताक्षर वाली एक लैब टेस्ट रिपोर्ट संलग्न की थी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि वह कोविड-19 पॉजिटिव है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने आत्मसमर्पण करने के लिए कोई समय नहीं दिया और यह बताया गया कि उसके द्वारा संलग्न की गई रिपोर्ट जाली थी, संबंधित डॉक्टरों को भी नोटिस जारी किए गए थे।
वहीं, दोनों डॉक्टरों ने हलफनामा दायर किया था और कहा था कि उन्होंने उस व्यक्ति को कभी भी ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है और उसके द्वारा दायर की गई रिपोर्ट वास्तव में पिछले साल अप्रैल में एक महिला को जारी की गई थी। शीर्ष अदालत ने तब उस व्यक्ति को नोटिस जारी किया कि उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। पीठ ने कहा कि उस व्यक्ति ने शीर्ष अदालत में मनगढ़ंत चिकित्सा प्रमाण पत्र दाखिल करने के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए एक हलफनामा दायर किया है। हालांकि, इस तथ्य पर विचार करते हुए कि उसने शुरुआत में ही अपराध को स्वीकार किया और बिना शर्त माफी मांगी, हम अदालत की अवमानना के आरोप में यह सजा देते हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि उसे संबंधित अतिरिक्त रजिस्ट्रार (सुरक्षा प्रभारी) के कार्यालय में ले जाया जाएगा जहां उसे अदालत के उठने तक हिरासत में रखा जाएगा। पीठ ने कहा कि वह 2,000 रुपये का जुर्माना भी अदा करेगा जो शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा किया जाएगा। साथ ही कहा कि रजिस्ट्री जुर्माना राशि सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति के खाते में जमा करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि उस व्यक्ति ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पारित पिछले साल जनवरी के आदेश को चुनौती देते हुए एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट में चार अप्रैल से प्रत्यक्ष रूप से सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में चार अप्रैल से अदालत परिसर में प्रत्यक्ष रूप से सुनवाई की जाएगी। शीर्ष अदालत में बुधवार को मामलों पर सुनवाई शुरू होने से पहले प्रधान न्यायाधीश ने एन वी रमण ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा, अगर अधिवक्ता चाहेंगे तो, सोमवार और शुक्रवार को ऑनलाइन सुनवाई के लिए हम लिंक मुहैया कराएंगे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने फैसले के लिए पीठ का शुक्रिया अदा किया।