फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या है सेना में स्थायी कमीशन, महिला सैनिकों को कैसे होगा फायदा

Mon, 17 Feb 2020 12:43 PM IST
Priyesh Mishra प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली

सार

दुनिया के बहुत से देश ऐसे हैं जहां सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दी जाती है। भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के मिलने से न केवल रक्षा के क्षेत्र में भारत का डंका बजेगा बल्कि सभी सेवा कर्मियों के लिए अवसर की समानता भी उपलब्ध होगी। जानिए स्थायी कमीशन मिलने से महिला सैन्य अधिकारियों को क्या फायदा होगा:
विज्ञापन
भारतीय सेना की महिला अधिकारी - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार युद्ध क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिलाओं को इस अवसर से वंचित करना न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अस्वीकार्य भी है।

स्थायी कमीशन से क्या बदलेगा

स्थायी कमीशन दिये जाने का मतलब यह है कि महिला सैन्य अधिकारी अब रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकती हैं। अगर वे चाहें तो पहले भी नौकरी से इस्तीफा दे सकती हैं। अब तक शार्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में नौकरी कर रही महिला अधिकारियों को अब स्थायी कमीशन चुनने का विकल्प दिया जाएगा। स्थायी कमीशन के बाद महिला अधिकारी पेंशन की भी हकदार हो जाएंगी।

इन विभागों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

महिला अधिकारियों को न्यायाधीश एडवोकेट जनरल, सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन दिया जाएगा।

पहले इन दो कोर में ही मिलता था महिलाओं को स्थायी कमीशन

सेना में कार्यरत महिला अधिकारियों को पहले सिर्फ न्यायाधीश एडवोकेट जनरल (JAG) और सेना शिक्षा कोर में ही स्थायी कमीशन दिया जाता था। इसके बाद इनकी संख्या में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई। हालांकि महिलाओं को अब भी युद्ध क्षेत्र में तैनाती नहीं दी जाएगी।

क्या है शॉर्ट सर्विस कमीशन

भारतीय सैन्य सेवा में महिला अधिकारियों को शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भर्ती की जाती है। जिसके बाद वे 14 साल तक सेना में नौकरी कर सकती है। इस अवधि के बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाता है। हालांकि 20 साल तक नौकरी न कर पाने के कारण रिटायरमेंट के बाद इन्हें पेंशन भी नहीं दी जाती है।

बदलते रहे शार्ट सर्विस कमीशन के नियम-कानून

सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के नियम कानून समय-समय पर बदलते रहे। पहले इसके तहत भर्ती महिलाएं केवल 10 साल तक ही नौकरी कर पाती थीं। बाद में सातवें वेतन आयोग में नौकरी की अवधि को बढ़ाकर 14 साल कर दिया गया। 

शार्ट सर्विस कमीशन से ये होता था नुकसान

महिला अधिकारियों को सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के द्वारा 14 साल की नौकरी करने के बाद सबसे बड़ी मुश्किल रोजगार मिलने की होती है। इनको पेंशन भी नहीं मिलती है जिससे इनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। इसके अलावा भी कई ऐसी सुविधाएं हैं जो इन्हें नहीं मिलती है। 

शार्ट सर्विस कमीशन क्यों शुरू किया गया

शार्ट सर्विस कमीशन शुरू करने का मकसद अधिकारियों की कमी से जूझ रही सेना की मदद करना था। इसके तहत सेना में बीच के स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें