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सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने वालों के बदले सुर, कहा- हमने सेना पर नहीं उठाया सवाल

Wed, 05 Oct 2016 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने वाले दलों और खासकर कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के सुर अचानक से बदल गए हैं। कांग्रेस अब कहने लगी है कि पाकिस्तानी दुष्प्रचार को जवाब देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान पर मचे बवाल के बाद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि उनके बयान को भाजपा और मीडिया ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया। 
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कांग्रेस सर्जिकल स्ट्राइक पर पाकिस्तान को जवाब देने के लिए सबूत या जानकारी तो चाहती है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अब ऐसे बयान देने से बचने लगी है। दरअसल, कांग्रेस को पार्टी नेताओं पी. चिदंबरम, दिग्विजय सिंह और संजय निरूपम के बयान अखरने लगे हैं और पार्टी को लगने लगा है कि इन नेताओं के बयानों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। 

कांग्रेस आलाकमान की ओर से इस मुद्दे पर अधिकृत लोगों को ही बयान देने को कहा गया है। पार्टी प्रवक्ता आपीएन सिंह ने बुधवार को एक बार फिर आनंद शर्मा और रणदीप सिंह सुरजेवाला की ओर से दी गई लाइन को आगे बढ़ाया और पार्टी का लिखित बयान जारी किया। पार्टी ने सोनिया और राहुल गांधी के पुराने बयानों को ही पार्टी का स्टैंड बताया गया और अन्य नेताओं के सबूत पेश करने वाले बयानों को उनके व्यक्तिगत बयान करार दिया।
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भारतीय डाक ने केजरीवाल को लताड़ा, फिर मांगी माफी

उधर, आम आदमी पार्टी के भी सर्जिकल स्ट्राइक पर अचानक सुर बदल गए हैं। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि न किसी को सबूत दीजिए, न वीडियो। पाकिस्तान प्रोपगेंडा को उसी तरह जवाब दीजिए, जैसे सेना ने सीमा पर दिया है। देश आपके साथ खड़ा है। प्रोपगेंडा का जवाब सिर्फ वीडियो या फुटेज में नहीं हो सकता। जवाब देने की भी रणनीति होती है।

भारतीय डाक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पहले कोसा गया और फिर विभाग की ओर से माफी मांग ली गई। ट्वीट करके इसमें केजरीवाल को ‘राजनीतिक फायदे’ के लिए पाकिस्तानी मीडिया में हेडलाइन बनाने का आरोप लगाया। हालांकि बाद में ट्वीट को हटा दिया गया और माफी भी मांग ली गई। 

भारतीय डाक के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से दोपहर 12 बजे ट्वीट किया गया। भारतीय डाक के एक अधिकारी ने बताया कि शायद यह हैकिंग या फिर तकनीकी गड़बड़ी का नतीजा है। पता लगते ही सुधार किया गया। हम इस ट्वीट के लिए माफी मांगते हैं। 
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