लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों पर शिकंजा कस दिया है। सोशल मीडिया में आपत्तिजनक सामग्री डालने वालों पर नजर रखने के लिए संबंधित कंपनियां अब 24 घंटे काम करेंगी। व्हाट्सएप, फेसबुक, यू-ट्यूब और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर कोई गैर-कानूनी या शांति व्यवस्था भंग करने वाली पोस्ट मिलती है तो आरोपी चंद घंटे में कानूनी कार्रवाई के घेरे में होंगे। उनका यूआरएल तो खत्म होगा ही, साथ ही उन्हें हिरासत में भी लिया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया संस्थानों से स्टाफ एवं कार्य अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था, जिसे मान लिया गया है। मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि पहले सोशल मीडिया मंच दो-तीन दिन में डॉटा मुहैया कराता था, अब तमाम सूचनाएं एक ही दिन में मिलने लगेंगी।
बता दें कि सोशल मीडिया पर अवांछित तत्व कई तरह की गलत सामग्री का प्रसार कर रहे हैं। पहले कुछ ऐसे संगठन, जो विदेशों में प्रतिबंधित हैं, वे भारतीय सोशल मीडिया में सेंध लगा रहे थे, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री डालने लगी हैं।
लोकसभा चुनाव के चलते अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की छवि खराब करने के लिए यू-ट्यूब और व्हाट्सएप का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विदेशों में प्रतिबंधित संगठनों ने लोकल स्लीपर सेल की मदद से सोशल मीडिया पर हजारों फर्जी यूआरएल (यूनीफॉर्म रीसॉर्स लोकेटर) बना लिए हैं। वे इन पर आपत्तिजनक सामग्री, खासतौर से देश के हितों को संकट में डालने वाली और समाज में तोड़फोड़ कराने वाली पोस्ट डालते रहते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर में चल रहे कई ऐसे समूह पकड़े थे, जिन्हें सीधे तौर पर सीमा पार से दिशा-निर्देश मिलता था। पत्थर फेंकने वाले अधिकांश समूह इन्हीं संगठनों से जुड़े हुए थे। इनके स्लीपर सेल अब दूसरे राज्यों में भी फैलते जा रहे हैं।
स्लीपर सैल इस तरह करते हैं सोशल मीडिया में घुसपैठ
आईटी विभाग के मुताबिक, सोमालिया, पाकिस्तान, ईरान, सूडान, बांग्लादेश, चीन, अफगनिस्तान, दुबई और पश्चिमी देशों में कई ऐसे प्रतिबंधित संगठन हैं, जो भारत में युवा वर्ग को अपना टारगेट बना रहे हैं। ये संगठन युवाओं को थोड़ा बहुत फायदा देकर अपनी मनमर्जी से गैर-कानूनी एवं आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया में चलवाते रहते हैं।
कुछ युवा तो महज फ्री अनलिमिटेड इंटरनेट प्लान के चक्कर में आकर गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। उत्तरपूर्व के अलावा, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं।
साइबर लॉ एक्सपर्ट के मुताबिक, अभी तक यह होता था कि जब भी कोई यूआरएल बंद होता है तो उस साइट को देखने वालों की संख्या बढ़ने लगती है। एक यूआरएल बंद होने की स्थिति में ऐसे लोग अप्रत्यक्ष रूप से दूसरे सर्विस प्रोवाइडर की मदद या अन्य तरीकों से आपत्तिजनक सामग्री आगे बढ़ाने लगते हैं। अब ऐसा नहीं होगा, सरकारी एजेंसियां और सोशल मीडिया मंत्र दोनों ही ऐसे लोगों पर निगरानी रखेंगे।
यह देखा जाएगा कि वह सामग्री दूसरे किसी सर्विस प्रोवाइडर द्वारा तो नहीं दिखाई जा रही है। अगर एजेंसी एक बार किसी सोशल मीडिया मंच को कोई रिपोर्ट देकर यह मांग करती है कि अमुक सामग्री गैर-कानूनी है तो वह सामग्री किसी भी मंच से नहीं चलाई जा सकेगी। उस सामग्री से जुड़ा एक लिंक सभी सर्विस प्रोवाइडर के पास पहुंच जाएगा।
तेजी से हो रही है कार्रवाई
साल हटाए गए यूआरएल
2015 587
2016 964
2017 1329
2018 2400