चीन के एक अखबार ने दावा किया है कि भारत के शासन से अरुणाचल के लोग खुश नहीं हैं। प्रदेश के निवासी फिर से चीन में वापस लौटना चाहते हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि दलाई लामा के दौरे से वहां के लोग खुश नहीं है और इसे वहां के स्थानीय निवासियों ने भारत की तरफ से किया गया एक धोखा करार किया है।
काफी मुश्किलों में जी रहे हैं अरुणाचल वासी
अखबार ने दावा किया कि भारत के शासन में अरुणाचल के लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई है। दलाई लामा का मकसद साफ है कि वो तवांग जैसे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाके को भारत को देना चाहते हैं। चीन तवांग को दक्षिण तिब्बत का इलाका मानता है और वो यहां के रहने वाले लोगों को अपना मानता है।
दलाई लामा को बताया भारत का बेटा
अखबार ने दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का विरोध करते हुए लिखा कि वो खुद को तो वैसे तिब्बतीयों का धर्मगुरू बताते हैं, लेकिन असल में वो भारत के बेटे हैं। यह बात दलाई लामा ने कम से कम 20 बार अपने मुंह से कही है। ऐसा व्यक्ति कैसे तिब्बतीयों का प्रतिनिधित्व कर सकता है और इस बार वो अपने प्रदेश के दौरे पर भारत को तवांग का हिस्सा भी बेच देने का प्लान है।
भारत और चीन के बीच 20 साल से सीमा विवाद चल रहा है। यह विवाद 3488 किलोमीटर लंबी सीमा पर है। जहां चीन इस हिस्से पर अपना हक बताता है, वहीं भारत अक्साई चीन को अपना हिस्सा बताता है।