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महाराष्ट्र के इस गांव में नहीं है बिजली, सड़क और मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवा भी नदारद

Sat, 27 Apr 2019 11:30 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अक्कलकुवा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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वसंत बिजा वसावे का नाम महाराष्ट्र की मतदाता सूची में सबसे पहले नंबर पर है। वह बावीपाडा के मनीबेली गांव में रहते हैं। यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से 15 किलोमीटर दूर है। मनीबेली अक्कलकुवा निर्वाचन क्षेत्र का पहला गांव है। जिसे 288 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर सूचीबद्ध किया गया है।

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अक्कलकुवा नंदूरबार लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। यह महाराष्ट्र के 48 लोकसभा क्षेत्रों की सूची में पहले स्थान पर आता है। बेशक यह गांव कई मायनों में पहले स्थान पर है लेकिन मनीबेली के निवासियों के पास न तो स्वास्थ्य सेवा है और न ही गैस कनेक्शन है और यहां चिट्ठी भी नहीं आती है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वसंत बिजा की पत्नी संगीता ने कहा, 'हमारे पास बिजली नहीं है और 2008 में दिए गए सोलर लैंप की बैटरी अब काम नहीं करती है।' गेहूं पीसने से लेकर बच्चों को स्कूल ले जाने तक के लिए वसावे को एक छोटी नाव का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह नाव भी हमेशा उपलब्ध नहीं होती है।
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हालांकि उन्होंने सोमवार के लिए एक नाव का इंतजाम कर लिया है क्योंकि उन्हें वोट डालने के लिए जाना है। वसावे ने कहा, 'हमने अभी निर्णय नहीं लिया है कि किसे वोट देना है। लेकिन गांव में सरकार के फैसलों की वजह से नाराजगी है।'

बावीपाडा सात पहाड़ियों पर स्थित सात बस्तियों में से एक है जो टापू की तरह दिखाई देता है। सरदार सरोवर बांध की वजह से यहां के पानी का स्तर बढ़ गया है। दिनेश वसावे ने कहा, 'सामान्य संचार के लिए हमें पहाड़ी पर खड़े होकर चिल्लाना पड़ता है। यहां से संदेश एक पहाड़ी से दूसरी पर भेजा जाता है। इस तरह से उचित स्थान तक संदेश पहुंचता है।'

मोबाइल नेटवर्क के लिए चुनाव आयोग के सदस्यों को सुनसान स्थान से दूसरी जगह पर भागना पड़ता है ताकि वह मुख्यालय को मतदाता प्रतिशत बता सकें। वसंत वसावे को अब तक तीन बार अपने परिवार को बढ़ते जल स्तर की वजह से स्थानांतरित करना पड़ा है। आखिरी स्थानांतरण 2007 में हुआ था।

दिनेश ने बताया कि घरों का निर्माण और शिफ्टिंग गांववालों के खर्च पर होता है। उन्होंने कहा, 'सपाट प्लॉट मिलने पर हम घर बनाने के लिए जरूरी सामान को इकट्ठा करते हैं। सभी गांववाले मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं। केवल एक दिन में हम पूरा घर बना लेते हैं।'
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