महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं, लेकिन भाजपा के नेताओं की मानें तो वहां एक सुपर सीएम भी हैं। यहां सुपर सीएम के रूप में देवेंद्र फडणवीस की बात हो रही है। हालांकि, वह राज्य में डिप्टी सीएम हैं। देवेंद्र फडणवीस को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं का बीपी भी बढ़ रहा है और केंद्रीय नेताओं के साथ उन्होंने संपर्क साधने शुरू कर दिया है। अंदरखाने में फडणवीस के पर कतरे जाने को लेकर भी चर्चाओं का गजब का दौर चल रहा है।
दरअसल, महाराष्ट्र भाजपा में मुख्यमंत्री रहने के दौरान फडणवीस ने अपने कई विरोधियों को अच्छे से निपटाया था। इस सूची में विनोद तावड़े, पूर्व मंत्री पंकजा मुंड समेत तमाम नेताओं के नाम लिए जाते हैं। फडणवीस के पंकजा के चचेरे भाई धनंजय मुंडे से भी अच्छे ताल्लुकात हैं। बताया जा रहा है कि जब से महाराष्ट्र में नई सरकार बनी है, तभी से यह तबका अपने करियर को लेकर खासा सशंकित है। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता भी तंज कस रहे हैं। उनका कहना है कि सीएम भले एकनाथ शिंदे हैं, लेकिन सरकार तो फडणवीस ही चलाएंगे।
अखिलेश यादव की तुलना मुलायम सिंह यादव से मत कीजिए
आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा चुनाव हारने के बाद समाजवादी पार्टी के अंदरखाने में हलचल देखी गई। एक युवा और सपा के समर्पित नेता की पीड़ा अभी भी नहीं जा रही है। नेता जी अखिलेश यादव के प्रिय पात्रों में हैं, लेकिन उपचुनाव में उम्मीदवार के चयन और चुनाव प्रबंधन को लेकर खासे नाक फुलाए हैं। उन्हें यह भी लग रहा है कि आजमगढ़ से डिंपल यादव उम्मीदवार होती तब भी सीट निकल जाती। इसी तरह से रामपुर को लेकर भी अपनी ही पार्टी को कोस रहे हैं। उनसे नहीं रहा गया तो अपने मन की भड़ास लेकर समाजपार्टी के ही टॉप थ्री में गिने जाने वाले नेता जी के पास पहुंच गए। नेता जी ने अपने युवा नेता को समझाया। पुचकारा और पीड़ा भी समझ गए। अंत में कहा भी कि आप अखिलेश यादव की तुलना मुलायम सिंह यादव से करके मत देखा कीजिए। नेता जी तो आंदोलन से निकले नेता हैं। यह फर्क तो रहेगा ही।
प्रधानमंत्री मोदी ने की तेजस्वी से बात, लालू को लाया गया दिल्ली
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लालू प्रसाद यादव के खराब स्वास्थ्य की जानकारी दी गई। लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य का पिता की तबियत को देखकर भावुक होना, तमाम बड़े लोगों को भावुक कर गया। बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव का हालचाल लेने पहुंच गए। खबर है कि मुख्यमंत्री अस्पताल में थे और कुछ समय बाद प्रधानमंत्री का फोन तेजस्वी यादव के पास पहुंच गया। प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेता का न केवल हालचाल जाना, बल्कि उनके इलाज और इसमें सहयोग की तत्परता भी दिखाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस्वी से बात की और बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इसके बाद लालू प्रसाद यादव को दिल्ली लाने के लिए दिल्ली दरबार सक्रिय हो गया है। हालांकि ऐसे नाजुक क्षण में भी जब राजनेता से जुड़ा है तो राजनीति करने वाले राजनीति के रंग ढूंढ ही लेंगे। वह भी अपने काम में लगे हैं।
मेनका और वरुण गांधी का स्टेटस सिंबल....आए दिन देश भर से आते हैं फोन
भाजपा की सुल्तानपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर भले ही पार्टी के केंद्रीस हुक्मरान मेहरबान न हो रहे हों, लेकिन देश की जनता के बीच में उन्होंने पशुओं पर अत्याचार रोकने को लेकर अपनी गजब की छवि बना ली है। यही स्थिति उनके पुत्र और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी की है। वह युवाओं में खासे चर्चित हो रहे हैं। दिलचस्प है कि मेनका और वरुण की चर्चा आप किसी भी भाजपा के नेता से करिए तो अधिकांश या तो मुंह बिचका लेते हैं या चर्चा करने से जी चुराते हैं। कुछ तो यहां तक भी कहते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इनका पत्ता कटना तय है। ताजा मामला उत्तराखंड में काशीपुर के कुंडा थाना क्षेत्र का है। यहां एक बहू ने सीधे अपने ससुर और देवर के अपराध को लेकर शिकायत की। दरअसल उसके ससुर और देवर ने मिलकर कुत्ते को पीटकर मार डाला था। उनका विरोध करते हुए बहू ने पुलिस थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस हरकत में नहीं आ रही थी। बताते हैं इसके बाद बहू ने सीधे मेनका गांधी से संपर्क किया और श्रीमती गांधी के सक्रिय होने के बाद पुलिस को हरकत में आना पड़ा। यह भी एक संयोग ही है कि उस महिला के ससुर और देवर को भाजपा के ही कुछ स्थानीय नेता बचाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
खबरी खोज रहे हैं कि आखिर अब कौन फडणवीस से मिलकर आया है?
महाविकास अघाड़ी सरकार का गिरना एनसीपी प्रमुख शरद पवार से हजम नहीं हो रहा है। फिलहाल पवार चाहते हैं कि उद्धव ठाकरे लोकसभा सांसदों को सहेजने में ऊर्जा लगाएं। शिवसेना के भीतर भी इसकी हलचल है कि भावना गवली और एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे करीब आधा दर्जन सांसदों के संपर्क में हैं। इसमें पालघर के सांसद भी गिने जा रहे हैं। यह सब टूट और बिखराव संसद के मानसून सत्र में होने की पटकथा भी लिखी जा रही है। इसी तरह से एनसीपी के कई विधायक और उद्धव ठाकरे के साथ खड़े होने वाले कुछ विधायकों की भी धड़कन तेज बताई जा रही है। बताते हैं इन सभी के पास किसी न किसी जांच एजेंसी की नोटिस है। ऐसे में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी का ज्यादा समय इसी सूचना को जुटाने में गुजर रहा है कि अब कौन देवेन्द्र फणनवीश से मिलकर आया है।