पांच माह के मासूम को जोल्गेन्स्मा इंजेक्शन के लिए 16 करोड़ रुपये की जरूरत थी, जब ये बात लोगों को पता चली, तो लोगों ने अपने अपने स्तर पर मदद की। केवल 42 दिन में 2.6 लाख से अधिक लोगों ने मासूम के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये की धनराशि दान में दी। इसके बाद बुधवार को बच्चे को इंजेक्शन की पहली खुराक दी गई। बच्चे की हालत स्थिर होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पिता राजदीप सिंह ने बताया कि अगर हम सब कुछ बेच भी देते और अपनी सेविंग्स को खत्म कर देते कर देते, तब भी हम इतना पैसा एक साथ इकट्ठा नहीं कर पाते। हमारे बेटे की जान बचाने के लिए मदद करने वाले लोग करोड़पति नहीं बल्कि आम लोग हैंं। 2.64 लाख से ज्यादा लोगों ने पैसा दिया। उन्होंने कहा कि जोल्गेन्स्मा इंजेक्शन पर 6 करोड़ तो बस आयात शुल्क था। हालांकिए केंद्र सरकार ने इस आयात शुल्क को माफ कर दिया, जिससे राजदीप का बोझ काफी कम हो गया।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। मुंबई के पीडी हिंदुजा अस्पताल में एक बाल न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर नीलू देसाई ने बताया कि यह बीमारी 8 से 10 हजार बच्चों में से एक बच्चे में पाई जाती है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर इस बीमारी का इलाज न कराया जाए, तो बच्चे की जान को खतरा हो सकता है और इस बीमारी का इंजेक्शन भी काफी महंगा है।