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Naravane Memoir Row: 'प्री-ऑर्डर का मतलब प्रकाशित किताब नहीं', पेंगुइन ने दोबारा जारी की सफाई; विवाद बढ़ा

Tue, 10 Feb 2026 05:44 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

पेंगुइन इंडिया ने एक बार फिर पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि प्री-ऑर्डर का मतलब किताब का प्रकाशित होना नहीं है।
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जनरल एमएम नरवणे, पूर्व सेना प्रमुख - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से एक और बयान जारी किया गया है। प्रकाशन ने मंगलवार को कहा कि किसी किताब या उसके प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होने की घोषणा को पब्लिकेशन नहीं माना जाना चाहिए।

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इसके साथ प्रकाशन ने कहा है कि प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और पब्लिश हुई किताब एक ही बात नहीं हैं। यह स्पष्टीकरण कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा नरवणे के 2023 के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देने के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि उनकी आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अब उपलब्ध है।

पेंगुइन ने अप्रकाशित किताब पर फिर जारी किया स्पष्टीकरण 
पेंगुइन ने अपने बयान में कहा 'एक घोषित किताब, प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और प्रकाशित किताब तीन अलग-अलग चीजें हैं। केवल घोषणा का मतलब है कि किताब भविष्य में प्रकाशित की जाएगी। प्री-ऑर्डर केवल पाठकों और रिटेलरों को अग्रिम आदेश देने की सुविधा देता है, इसका मतलब यह नहीं कि किताब पहले से ही उपलब्ध है।'
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साथ ही उन्होंने कहा कि प्रकाशन की निर्धारित तिथि केवल योजना का संकेत है, किताब बाजार में तभी उपलब्ध होती है जब इसे खरीदने के लिए रिटेल चैनलों पर रखा गया हो। पेंगुइन ने पहले कहा था कि किताब के प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई संस्करण प्रकाशित, वितरित या बेचा नहीं गया है।

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राहुल गांधी का आरोप
लोकसभा में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने नरवणे के 2023 के सोशल मीडिया पोस्ट को पढ़ा और कहा 'यह ट्वीट खुद नरवणे ने किया था। मेरी बात यह है कि या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन। दोनों सच नहीं हो सकते। गांधी ने कहा कि किताब अमेजन पर उपलब्ध है और नरवणे ने ट्वीट करके लोगों से इसे खरीदने को कहा था। (संबंधित खबर यहां पढ़ें) 

अनधिकृत कॉपी और FIR
पेंगुइन ने स्पष्ट किया कि उनके पास नरवणे की आत्मकथा के विशेष प्रकाशन अधिकार हैं और कोई भी अनधिकृत संस्करण अभी तक नहीं प्रकाशित हुआ। दिल्ली पुलिस ने किताब की डिजिटल और अन्य प्रारूपों में कथित अनधिकृत वितरण के मामले में FIR दर्ज की है। राहुल गांधी पहले ही संसद परिसर में किताब की कथित प्रति दिखा चुके हैं और 2 फरवरी से लोकसभा में इसके अंश पढ़ना चाहते थे, लेकिन पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए उन्हें अनुमति नहीं मिली।
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