सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर याचिका डालने वाले J&K बार एसोसिएशन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन को कहा कि यहां हिंसक प्रदर्शन रोकने का लिखिल भरोसा दे सकते हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि हालात सुधारने का सुझाव दें तो ज्यादा अच्छा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हितधारकों के बात करिए और इस मामले में उनकी राय लीजिए।
इससे पहले भी सुनावाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर सशस्त्र बल पैलेट गन की जगह असली गोली का इस्तेमाल करते तो अब तक करीब 20 हजार लोग जान गंवा चुके होते। वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि हमारा इरादा लोगों को मारने का नहीं है लेकिन सवाल यह है कि सुरक्षा बलों से क्या उम्मीद की जानी चाहिए जब नकाबपोश प्रदर्शनकारी चारों ओर से हमला करने लगे।
उन्होंने आगे कहा कि हम पैलेट गन का इस्तेमाल तब करते हैं जब हिंसक भीड़ बिल्कुल नजदीक आ जाती है और वहां से जाने का नाम नहीं लेती है। हमारे सशस्त्र बल शरारती नहीं हैं लेकिन वहां कि स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि रविवार को हुए उपचुनाव के दौरान करीब 100 सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से कहा कि इस तरह के मामले में एसोसिएशन का भूमिका बेहद अहम हो जाती है। एसोसिएशन को इसमें अदालत की मदद करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि इस मामले को राजनीति से दूर रखकर एसोसिएशन को मदद करनी चाहिए, जिससे कि इतिहास रचा जा सके।