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Tamil Nadu: 'मंदिर में योग्य व्यक्ति को बनाएं पुजारी, जाति की कोई भूमिका नहीं', मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 27 Jun 2023 01:29 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

मद्रास हाईकोर्ट में मुथु सुब्रमण्यम गुरुक्कल की तरफ से तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआर एंड सीई) के 2018 में श्री सुगवनेश्वर स्वामी मंदिर में पुजारियों की भर्ती के लिए निकाले गए एक विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। 
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madras high court - फोटो : PTI
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट ने पुजारियों की नियुक्ति पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति में जाति की कोई भी भूमिका नहीं होती है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि पुजारी रखते हुए सिर्फ ये देखा जाना चाहिए कि व्यक्ति उस योग्य है या नहीं। साथ ही शख्स को अपने काम में अच्छी तरह से पारंगत हो, प्रशिक्षित हो और जरूरत के हिसाब से पूजा करने के लिए योग्य हो। अगर व्यक्ति इन सभी मानदंडों को पूरा करता है तो जाति की इसमें कोई भी भूमिका नहीं होगी।

जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने साल 2018 की एक याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए ये अहम टिप्पणी की। इस मामले में जाति को आधार बताते हुए पुजारी की नियुक्ति को लेकर निकाले गए विज्ञापन को चुनौती दी गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया।

यह है मामला

बता दें, मद्रास हाईकोर्ट में मुथु सुब्रमण्यम गुरुक्कल की तरफ से तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआर एंड सीई) के 2018 में श्री सुगवनेश्वर स्वामी मंदिर में पुजारियों की भर्ती के लिए निकाले गए एक विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। 

याचिकाकर्ता गुरुक्कल ने इस मामले को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये उनके वंशानुगत अधिकारों का उल्लंघन है। गुरुक्कल ने अपने दादा से पुजारी का पद संभाला था, जिसके पीछे उनका तर्क था कि उनका परिवार प्राचीन काल से यही काम करता आया है।

इस मामले में फैसला सुनाने से पहले जस्टिस वेंकटेश ने 2016 के अखिल भारतीय आदि शैव शिवचारिगल सेवा संगम बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि मंदिर के पुजारी की नियुक्ति एक धर्मनिरपेक्ष काम है, इसमें वंशानुगत कुछ नहीं है। 

मद्रास हाईकोर्ट ने निर्देश दिया की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ही पुजारी की नियुक्ति होनी चाहिए। कोर्ट ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी को एक विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया, साथ ही याचिकाकर्ता को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक पूजा करने की इजाजत भी दी। इसके अलावा हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में भी हिस्सा ले सकता है। 

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