फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health: अब रक्त नमूनों की गुणवत्ता खराब होने से बचाएगी पीसीएम तकनीक, तापमान से पड़ता है दुष्प्रभाव

Fri, 09 Aug 2024 05:47 AM IST
विशांत श्रीवास्तव परीक्षित निर्भय, अमर उजाला

सार

अब पीसीएम तकनीक के जरिए रक्त नमूनों की गुणवत्ता खराब होने से बचाई जाएगी। तापमान से रक्त नमूनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
 
विज्ञापन
रक्त नमूना - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अब एक नई तकनीक के सहारे रक्त नमूनों की गुणवत्ता को खराब होने से बचाया जा सकता है। इस फेज चेंज मटेरियल (पीसीएम) तकनीक से बने पैकेजिंग में नमूने को सही तापमान पर रखा जाता है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि जब भी किसी चिकित्सा जांच के नतीजे गलत आते हैं तो अक्सर टाइपिंग मिस्टेक को दोष दिया जाता है जबकि इसका मूल कारण तापमान में बदलाव होता है। 
विज्ञापन


यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अनुसार, रक्त नमूनों को रखने के लिए अलग अलग नियमों का पालन करना चाहिए। अगर लाल रक्त कोशिकाओं की जांच के लिए नमूना लिया गया है तो उसे एक से छह डिग्री सेल्सियस के तापमान पर 42 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अगर प्लेटलेट्स जांच के लिए नमूना लिया है तो उसे 20 से 24 डिग्री तापमान पर लगातार हिलाते हुए पांच दिन तक रखा जा सकता है। अगर प्लाज्मा को रक्त से लिया गया है तो उसे आठ घंटे के अंदर -18 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर जमा किया जाना चाहिए।

प्लस एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज के उपाध्यक्ष विष्णु शशिधरन ने बताया कि ज्यादा तापमान से रक्त नमूनों में कुछ बायोकैमिकल बदलाव हो सकते हैं। खून में कई तरह के सेल्स, प्रोटीन और एंजाइम होते हैं, जो तापमान बदलने से खराब हो सकते हैं। इससे टेस्ट के नतीजे गलत आ सकते हैं और मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाएगा।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि नई तकनीक में फेज चेंज मटेरियल एक खास तरह का पदार्थ है जो तापमान बदलने पर गर्मी को सोख लेता है या छोड़ता है। इससे नमूने का तापमान सही बना रहता है। ये बर्फ से अलग होते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक ठंडक देते हैं। पीसीएम को इस तरह बनाया जाता है कि ये नमूने को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रख सकें, चाहे बाहर का तापमान कितना भी हो।

छोटे शहरों में ज्यादा जोखिम
रक्त नमूनों की गुणवत्ता का सबसे बड़ा जोखिम छोटे शहरों के मरीजों के लिए होता है। यहां से जांच प्रयोगशालाएं कई किमी दूर होती हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि अगर नमूने को सही तापमान पर नहीं रखा गया तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें