देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स में अब मरीजों के इलाज में एआई का उपयोग होगा। यहां मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मरीजों का इलाज करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स में अब मरीजों के इलाज में एआई का उपयोग होगा। यहां मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मरीजों का इलाज करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एआई के उपयोग से स्वास्थ्य को लेकर हो रही रिसर्च में तेजी आने और मरीजों का इलाज बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है। एआई समिट में भारत के दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बधवार को इसकी शुरुआत की।
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बुधवार को एम्स पहुंचे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद मैक्रों ने यहां छात्रों से लंबी बातचीत की। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारी संख्या में भारतीय छात्रों को अपने यहां आने देना चाहता है। साथ ही वह अधिक से अधिक संख्या में छात्रों को भारत भेजना चाहता है जिससे दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय बने। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया को भी आसान करेगा जिससे वे आसानी से अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि दोनों देश एक दूसरे के यहां अधिक संख्या में छात्रों को भेजने पर सहमत हुए हैं। शुरुआती दौर में यह संख्या दस हजार के आसपास होगी। लेकिन, उन्होंने कहा कि यह सहयोग धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा और 2030 तक यह संख्या 30 हजार के करीब करने पर सहमति बनी है। भारतीय छात्रों के विदेश में शिक्षा ग्रहण करने से भारतीय पेशेवरों में तकनीकी क्षमता बढ़ती है जिससे लाभ मिलता है।
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एआई समिट में शामिल विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में गरीब वर्ग को कम मूल्य पर उचित इलाज देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत सहायक हो सकता है। इससे सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी कम समय में और आसानी से स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाई जा सकती है। एआई के सहयोग से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी क्रांति होने की संभावना जताई जा रही है।