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उत्तर गुजरात में पाटीदारों के समर्थन से कांग्रेस मुकाबले में

Thu, 30 Nov 2017 05:18 PM IST
विनोद अग्निहोत्री, मेहसाणा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने जिले मेहसाणा समेत पूरे उत्तर गुजरात में कांग्रेस पाटीदारों के भरोसे भाजपा को चुनौती देती दिख रही है। जिन सीटों पर कभी कांग्रेस को बूथ स्तर पर बस्ता लगाने वाले कार्यकर्ता नहीं मिलते थे, वहां अब पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के युवा कार्यकर्ता कांग्रेस का झंडा उठाकर चल रहे हैं और भाजपा उम्मीदवारों के रास्ते में कांटे बो रहे हैं। हालांकि मोदी के अपने शहर वडनगर में भाजपा का झंडा सबसे ऊपर है और हर वर्ग और जाति के लोग सिर्फ एक ही बात कहते हैं कि हमारा नरेंद्र भाई पंत प्रधान है तो हम उसके साथ नहीं जाएंगे तो किसके साथ जाएंगे।
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जबकि मेहसाणा, विसनगर, कड़ी और उंझा में पाटीदारों की नाराजगी कांग्रेस की ताकत बनती नजर आ रही है और यहां भाजपा को कांग्रेस कांटे की टक्कर दे रही है। लेकिन खेरालू बेचराजी जैसी कुछ सीटों पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों ने समीकरण बदल दिए हैं। खेरालू के चौक पर बैठे रमेश भाई चौधरी कहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनाती दिख रही थी, लेकिन उत्तर गुजरात की कई सीटों पर खराब टिकट बांटने से उसकी संभावना अब कमजोर लगने लगी है। लेकिन कांग्रेस की पूर्व सांसद अलका क्षत्री इससे सहमत नहीं हैं। मेहसाणा में उनसे मुलाकात होती है। अलका कहती हैं कि कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में कठिनाई जरूर आई, लेकिन इस बार जनता 22 साल के भाजपा शासन से मुक्ति चाहती है, इसलिए कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा। 

गुजरात की राजनीति में दो साल पहले आए पाटीदार अनामत आंदोलन रूपी सियासी भूकंप का एपिक सेंटर माने जाने वाले मेहसाणा को उत्तरी गुजरात की राजनीति का केंद्र कहा जाता है। इसी जिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं, तो इसी जिले से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की कद्दावर पाटीदार नेता मानी जाने वाली आनंदी बेन पटेल और मौजूदा उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल भी आते हैं। मेहसाणा के विसपुर के भाजपा विधायक ऋषिराज पटेल के साथ हुए विवाद से ही पाटीदार असंतोष की चिंगारी आंदोलन की ज्वाला बनी जिसने पूरे गुजरात को अपनी चपेट मे ले लिया और गुजरात की सियासत में अचानक एक युवा नेता हार्दिक पटेल का उदय हुआ। अहमदाबाद के जीसीडीसी मैदान में जमा लाखों पाटीदारों की रैली के बाद हुए पुलिस लाठीचार्ज और गोलीबारी में मरने वाले ज्यादातर युवक मेहसाणा जिले के ही थे। फिर एक पाटीदार युवक की पुलिस हिरासत में मौत हुई, वह भी इसी जिले का था। इसलिए पाटीदार असंतोष की ज्वाला सबसे ज्यादा उत्तरी गुजरात में ही भड़क रही है। न सिर्फ मेहसाणा, बल्कि सिद्धपुर, पाटन, पालनपुर, बनासकांठा आदि जिलों तक इस आग की आंच गरम है। इसलिए पिछले विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनावों में जिस उत्तर गुजरात ने भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दी थीं, आज वहां एक-एक सीट पर भाजपा को कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है। 
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मेहसाणा से पहले नंदासण में चाय की दुकान पर बैठे मुसलमानों से बात होती है, तो सब एक सुर से कहते हैं कि यह कड़ी विधानसभा का इलाका है और इस बार कांग्रेस और भाजपा का जबर्दस्त मुकाबला है। एक बार निर्दलीय चुनाव लड़ चुके गुलाम मोहम्मद मंसूरी तो कांग्रेस का पलड़ा भारी बताते हैं। उनके मुताबिक वजह यह है कि इलाके के प्रभावशाली पाटीदारों की आबादी के 70 फीसदी से भी ज्यादा लोगों का समर्थन इस बार कांग्रेस को मिल रहा है। मंसूरी का कहना है कि बाकी तीस फीसदी पाटीदारों में 20 फीसदी तो अब भी भाजपा को मन मारकर वोट देंगे क्योंकि वह उसके कट्टर समर्थक हैं, लेकिन दस फीसदी या तो वोट देने ही नहीं जाएंगे या फिर नोटा बटन दबाकर चले आएंगे। मेहसाणा में उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल खुद भाजपा से मैदान में हैं। संघ से जुड़े रहे और पेशे से ट्रांसपोर्टर बलदेव भाई पटेल भी मानते हैं कि इस बार मुकाबला कांटे का है। बलदेव भाई कहते हैं कि वो खुद तो अपना वोट भाजपा को ही देंगे, लेकिन पाटीदारों की नाराजगी ने यहां कांग्रेस का पलड़ा कुछ भारी कर रखा है।
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