अदालत ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला 8 जनवरी तक सुरक्षित रख लिया। सीबीआई ने मेनका गांधी को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे शिकायतकर्ता ने चुनौती दी थी। मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एनजीओ गांधी रूरल वेलफेयर ट्रस्ट को नियमों की अनदेखी कर 50 लाख रुपये का अनुदान देने से जुड़ा है। जब यह अनुदान दिया गया, उस दौरान मेनका गांधी सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थीं।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरुण भारद्वाज के समक्ष याची वीएम सिंह ने कहा कि एनजीओ सरकार से अनुदान लेने के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं करता था। इसके बावजूद नर्सिंग कॉलेज बनाने के लिए सरकारी जिला अस्पताल की जमीन को गांधी रूरल वेलफेयर ट्रस्ट ने अपनी जमीन बताते हुए अनुदान के लिए आवेदन किया।
याची का कहना है कि यह एजनीओ साल 2000 में बनाया गया था। तीन साल की अवधि पूरी होने की शर्त को अनदेखा कर इसे 50 लाख रुपये का अनुदान दिया गया। यह अनुदान चौक पीलीभीत में कॉलेज बनाने के लिए अनुदान लिया गया, लेकिन पूरनपुर में कॉलेज बनवा दिया या।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 2006 में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने इस मामले में 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। सीबीआई ने याचिका में जवाब में यह माना कि अनुदान गलत तरीके से दिया गया था, लेकिन उसका उपयोग सही हुआ था।