लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पार्टी में ‘लोकतंत्र की कमी’ संबंधी चिंताओं को सही पाया। इसी के बाद चिराग पासवान को हटाकर नया नेता चुना गया।
उन्होंने कहा कि पार्टी में लोकतंत्र की कमी होने के चलते हमने लोकसभा अध्यक्ष से सदन में नेतृत्व में बदलाव का आग्रह किया था। अध्यक्ष ने हमारी चिंता को सही पाया और चिराग की जगह उन्हें सदन में पार्टी का नेता बनाया। पशुपति ने कहा कि चिराग पासवान ने लोकसभा अध्यक्ष से अपने फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। अध्यक्ष ने हमें बताया था कि पार्टी का संविधान देश से अलग है और नियमों के मुताबिक सही फैसला लिया गया है।
इससे पहले लोजपा ने राष्ट्रीय, प्रदेश कार्यकारिणी और विभिन्न प्रकोष्ठों की समितियों को भंग कर दिया था। साथ ही सांसद चौधरी महबूब अली कैसर और वीणा देवी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद प्रिंस राज व चंदन सिंह को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया। दिवंगत रामविलास पासवान ने 2000 में लोजपा की स्थापना की थी। राजनीति के मौसम विज्ञानी कहे जाने वाले पासवान का पिछले साल अक्तूबर में निधन हो गया था।
चिराग की बैठक ‘किराए की भीड़ : पशुपति पारस
लोक जन शक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता पशुपति कुमार पारस ने चिराग की ओर से रविवार को बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को ‘किराए की भीड़’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बैठक की कोई वैधता नहीं है। लोजपा नेता ने संवाददाताओं से कहा कि अब चुनाव आयोग फैसला करेगा कि उनका गुट सही लोजपा है या फिर चिराग का गुट।
पारस ने कहा कि चिराग की ओर से बुलाई गई कार्यकारिणी की बैठक में कुछ ही सही सदस्य थे बाकी ‘किराए की भीड़’ थी। उन्होंने पिछले दिनों पटना में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक को सही बैठक बताया। लोजपा नेता ने कहा कि पासवान का 2019 में अध्यक्ष बनाया जाना अवैध था क्योंकि उन्हें मनोनीत किया गया था। उन्हें चुना नहीं गया था।